कोटद्वार। भाबर क्षेत्र के अंतर्गत मवाकोट में घराट गदेरे के मुहाने पर वन विभाग की ओर से बनाई जा रही सुरक्षा दीवार के निर्माण कार्य को मवाकोट के ग्रामीणों ने शुक्रवार को रुकवा दिया। ग्रामीण घराट गदेरे में सुरक्षा दीवार का निर्माण कराने के बजाय गदेरे के मुहाने में जमा मलबा और अतिक्रमण हटाने की मांग पर अड़े रहे।
शुक्रवार को मवाकोट के ग्रामीण घराट गदेरे में पहुंचे, यहां उन्होंने मलबा न हटाने की स्थिति में काम न करने देने की चेतावनी दी। इस मौके पर आक्रोशित ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया और गदेरे में बनी दीवार को भी तोड़ डाला। सामाजिक कार्यकर्ता भवानी दत्त लखेड़ा ने कहा कि गदेरे में अतिक्रमण और पक्के भवन बनने से गदेरे में पानी की निकासी बाधित हो रही है। पिछले दो सालों से मवाकोट से लेकर नींबूचौड़ व खूनीबड़ तक हजारों की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण गदेरे के मुख और गदेरे में हुए अवैध अतिक्रमण और सड़क पर जमा मलबा हटाने की लगातार मांग करते आ रहे हैं, लेकिन वन विभाग ने अभी तक मांग पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि नाले में सुरक्षा दीवार बनाए जाने से हजारों की आबादी प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि मलबा और अतिक्रमण न हटाने की स्थिति में ग्रामीण उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। प्रदर्शनकारियों में शोभा रावत, विनीता रावत, कुसुम खंतवाल, विनीता नेगी, ममता, विमला देवी, प्रमिला जोशी, श्याम सिंह नेगी व योगंबर सिंह नेगी आदि शामिल रहे।
दूसरी ओर, कोटद्वार रेंज के अधिकारी आरपी पंत ने कहा कि वन विभाग की ओर से जंगल के बरसाती पानी को गांव की ओर आने से रोकने के लिए मवाकोट में जगदेव नाले से लेकर मालन नदी तक करीब 62 मीटर लंबी बाढ़ सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जा रहा है। मवाकोट के ग्रामीण मलबा हटाने की मांग कर रहे हैं। मामले में ग्रामीणों से बातचीत कर समस्या का समाधान किया जाएगा।
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