कोटद्वार। कोटद्वार भाबर क्षेत्र में गत 25 अगस्त की भारी बारिश से सड़कों की हालत खस्ताहाल हो गई है। सबसे बुरी हालत ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की है। सड़कों पर गहरे गड्ढे होने के बावजूद विभाग सड़कों की मरम्मत कराने की जहमत नहीं उठा रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
कोटद्वार भाबर क्षेत्र में भारी बारिश से गत 25 अगस्त को आई बाढ़ से क्षेत्र की मुख्य सड़कों के साथ ही गांवों के संपर्क मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो गए थे। सनेह पट्टी के अंतर्गत गाड़ीघाट-सनेह मार्ग पर रतनपुर, लालपानी में कई जगहों पर गहरे गड्ढे पड़ गए हैं। सनेह तल्ली में रपटा क्षतिग्रस्त होने से लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुंभीचौड़ में जामनुस्रोत में बने पुल के समीप पुश्ता ढहने से सड़क का करीब 50 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। सिताबपुर तिराहा-घराट मार्ग पर मानपुर चौराहे तक पूरी सड़क में गहरे गड्ढे पड़ गए हैं। मथुरा वेडिंग प्वाइंट-घराट मार्ग पर पेयजल लाइन बिछाने के बाद सड़क पर लगाई गई सीमेंट बाढ़ में बह गई।
ग्रामीण बलबीर सिंह नेगी व पूजा बलूनी का कहना है कि गुरु रामराय स्कूल से पदमपुर चौराहा तक मार्ग के बीच में गहरे खड्डे पड़ गए हैं। रोशनलाल कुकरेती और विमला देवी का कहना है कि भाबर क्षेत्र में भी दुर्गापुरी-नंदपुर मार्ग, निंबूचौड़-मवाकोट मार्ग, मोटाढांक-शिवराजपुर मार्ग, दुर्गापुरी-शिवराजपुर मार्ग की हालत खस्ताहाल हो चुकी है। अधिकांश मार्गों पर ओएफसी लाइन बिछाने के बाद लगाई गई मिट्टी बाढ़ में बहने से सड़कों के किनारे गहरे गड्ढे बन गए हैं। पिछले तहसील दिवस में ग्रामीण क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत की मांग कर चुके हैं, लेकिन विभाग लापरवाह बना हुआ है।
लोनिवि दुगड्डा के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह ने कहा कि कोटद्वार-भाबर क्षेत्र में बाढ़ से विभाग की कई सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा है। विभाग की ओर से शासन को 50 लाख की डीपीआर तैयार कर भेजी गई है। धनराशि स्वीकृत होते ही मार्गों के सुदृढ़ीकरण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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