किशनपुर (कोटद्वार)। भाबर के तेलीस्रोत गदेरे में प्राइवेट क्लीनिक संचालकों द्वारा फेंका गया बायो-मेडिकल कचरा लोगों के साथ ही पालतू पशुओं और वन्यजीवों के लिए खतरा बन गया है। सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बायो-मेडिकल कचरे का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है। दोषी पाए जाने पर संबंधित क्लीनिक संचालक के खिलाफ बायो-मेडिकल वेस्ट अधिनियम 1998 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बृहस्पतिवार को तहसील प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के डा. सागर अग्रवाल, डा. अजय सिंह नेगी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कलालघाटी के प्रभारी राकेश मिश्रा, वीएन जोशी, एसपी मैठाणी, कीर्ति कुकरेती की टीम ने तेेलीस्रोत में फेंके गए बायोमेडिकल कचरे का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच टीम गठित कर मामले की जांच की जा रही है। निजी क्लीनिकों को नोटिस दिए जा रहे हैं। दोषी पाए जाने पर संबंधित क्लीनिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण देवेंद्र राणा, दिनेश जोशी, वीरेंद्र प्रसाद, राममोहन, नवीन शर्मा, राकेश ध्यानी, बृजमोहन रावत का कहना है कि ऐसे कचरे को किसी गहरे गड्ढे में डालकर दबाना चाहिए, अन्यथा यह मनुष्य और जीवों के जीवन को संकट में डाल सकता है। इंजेक्शन, सीरींज, एक्सपायरी दवाइयां आदि खतरनाक कचरा बरसाती नाले के माध्यम से खेतों में जा रहा है। एसडीएम राकेश तिवारी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाएगी।
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