कोटद्वार। चाई ग्रामोत्सव के दूसरे दिन ‘गढ़वाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा’ विषय पर विचार गोष्ठी एवं लोक भाषा गढ़वाली पर कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान नई पीढ़ी को गांव से जोड़ने के उपायों पर जहां गंभीर चिंतन-मंथन हुआ, वहीं पहाड़ की संस्कृति के महत्व को भी रेखांकित किया गया। समारोह में संस्कृति विभाग उत्तराखंड की टीम ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
बुधवार को जयहरीखाल प्रखंड के चाई गांव में आयोजित विचार गोष्ठी का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री के सलाहकार डा. नवीन बलूनी ने किया। उन्होंने कहा कि गढ़वाल की संस्कृति देव संस्कृति है और पूरी मानवता के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि खुद के प्रयासों से नई राह बनेंगी। गोष्ठी के मुख्य वक्ता आकाशवाणी के पूर्व केंद्र निदेशक एवं लोक संस्कृति विशेषज्ञ चक्रधर कंडवाल ने गढ़वाल की संस्कृति को देश की विशिष्ट संस्कृति बताया।
समारोह में जीआईसी सौली के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान उत्तराखंड के जादूगर मोहनलाल ने मैजिक शो दिखाया। धर्मेंद्र रावत ग्रुप एवं ग्रामीणों की ओर से भजन प्रस्तुत किए गए। संस्कृति विभाग उत्तराखंड की ओर से पर्वतीय रंगमंच पौड़ी के कलाकारों ने मोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस दौरान थड़िया, चौफुला, घसियारी आदि लोकगीतों पर दर्शक खूब थिरके।
समारोह में बलूनी क्लासेस के एमडी विपिन बलूनी, नवीन बलूनी, डा. एसएस राणा व रोशन भारद्वाज ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर उत्तरांचल उत्थान परिषद के अध्यक्ष प्रेम बुड़ाकोटी, जगमोहन बुड़ाकोटी, सच्चिदानंद, संगीत बुड़ाकोटी, शेखर बुड़ाकोटी, अशोक बुड़ाकोटी, ललन बुड़ाकोटी, दिनेश, राज्यवर्द्धन, डा. पदमेेश बुड़ाकोटी आदि मौजूद रहे।
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