कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ के साथ उनके आवास में की गई कथित अभद्रता को लेकर दर्ज की गई नामजद रिपोर्ट के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से भड़के वन कर्मियों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। उन्होंने अपने कार्य से विरत रहकर बैठक की और प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की मांग की। उन्होंने अपने कार्य से विरत रहकर बैठक की और प्रशासन से आरोपियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की मांग की। 24 जुलाई तक ऐसा नहीं होने पर 25 जुलाई से पूूर्ण कार्यों का बहिष्कार और तालाबंदी करने की चेतावनी दी।
सोमवार को वन अधिकारी कर्मचारी संघर्ष समिति के संरक्षक सत्य प्रकाश कंडवाल के नेतृत्व में वन कर्मी लैंसडौन वन प्रभाग के मुख्यालय में एकत्र हुए। इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने आरोपियों पर मामले को जबरन धार्मिक बनाने का आरोप लगाया। कहा कि वन अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए वन क्षेत्र में तीन दीवारों के बने ढांचे को तुड़वाकर अपनी ड्यूटी पूरी की है, लेकिन 40-50 लोगों ने इसे धार्मिक मामला बनाते हुए प्रभागीय वन अधिकारी मयंक शेखर झा के आवास के अंदर घुसकर उनके साथ गाली गलौच और हाथापाई की। इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
वक्ताओं ने पुलिस प्रशासन पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। कहा कि डीएफओ के साथ अभद्रता को लेकर अगले दिन चार लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखाई गई थी। वे लोग कोतवाली में आ-जा रहे हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन उनको गिरफ्तार नहीं कर रहा है। इस अवसर पर समिति के मंत्री संजय कुमार सागर, सुरेंद्र सिंह चौहान, अनिल देवलाल, सतविंदर पाल सिंह, दिनेश चंद्र, वीरेंद्र सिंह लिंगवाल, राजकुमार बत्रा, दामोदर प्रसाद, अजय बहुखंडी, कपिल थपलियाल व दीपक रावत आदि मौजूद थे।