कोटद्वार। राजकीय बेस चिकित्सालय की बदहाल इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं। मंगलवार को अस्पताल में इलाज के दौरान व्यापारी सुभाष चौधरी की मौत के बाद लोग अस्पताल की सेवाओं को लेकर सकते में हैं। हलांकि अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य महानिदेशक से घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने की सिफारिश की है।
मंगलवार को कोटद्वार बेस अस्पताल में सुबह साढ़े आठ बजे पहुंचे कोटद्वार के व्यापारी सुभाष चौधरी को हार्ट अटैक का दौरा पड़ा था। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ने उन्हें विशेषज्ञ डाक्टर को न दिखाकर स्वयं इंजेक्शन लगाकर इमरजेंसी से चलता कर दिया। फिजिशियन को दिखाने के चक्कर में मरीज ने करीब पांच घंटे बाद दम तोड़ दिया था। इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात फार्मेसिस्ट डीएस नेगी ने बताया कि सुभाष चौधरी सुबह करीब साढ़े आठ बजे इमरजेंसी में आए थे, उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। ड्यूटी पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) डा. सुनील शर्मा ने निर्देश पर मरीज को सांस की बीमारी (अस्थमा) का इंजेक्शन डेरीफाइलीन और डेक्सा लगाया गया था।
अस्पताल के फिजीशियन डा. जेसी ध्यानी ने बताया कि करीब डेढ़ बजे मरीज उनके पास आया। जांच में मरीज के हृदय में कंपन हो रही थी, हार्ट अटैक की आशंका होने पर तत्काल उनका ईसीजी कराया गया। हार्ट अटैक की पुष्टि होने पर मरीज को भर्ती किया गया था, लेकिन, इसी बीच हार्ट ब्लॉक होने से मरीज की मौत हो गई। अस्पताल के सीएमएस डा. आईएस सामंत ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि मामले की उच्चस्तरीय जांच की संस्तुति स्वास्थ्य महानिदेशक से की गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।