कोटद्वार। अब लैंसडौन वन प्रभाग के बीहड़ों में घुसने वाले अपराधियों पर वन प्रभाग की आधुनिक हथियारों से लैस स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) कहर बनकर टूटेेगी। वन प्रभाग ने वर्ल्ड वाइड लाइफ फंड (डब्लूडब्लूएफ) के साथ मिलकर 12 लाख 44 हजार की लागत से एसओजी टीम को तैनात करने की योजना बनाई है।
43327.60 हेक्टेयर में पांच रेंजों में फैले लैंसडौन वन प्रभाग की अधिकतर सीमा उत्तर प्रदेश से सटी होने और अधिक संख्या में वन्यजीव और वन संपदा होने के कारण अति संवेदनशील है। वन तस्कर यूपी से जंगल में घुसकर वारदात को अंजाम देते हैं। जंगल की सुरक्षा को देखते हुए लैंसडौन वन प्रभाग डब्लूडब्लूएफ के साथ मिलकर टीम का गठन करेगा। इसके लिए लैंसडौन वन प्रभाग के सभी रेंजों से फिट और समर्पित वन कर्मियों और अधिकारियों की छह सदस्यीय टीम को चुना गया है। टीम का सीधा संपर्क डीएफओ कार्यालय से होगा, उन्हें अन्य किसी कार्य में नहीं लगाया जाएगा।
आधुनिक हथियारों और ट्रेनिंग से होगी एसओजी टीम लैस
डीएफओ कार्यालय के अनुसार छह सदस्यीय एसओजी टीम को पूरी तरह से तैयार करने के लिए 12 लाख 44 हजार का बजट बनाया गया है। इसके तहत टीम को आठ लाख रुपये की महिंद्रा थार वाहन, विशेष वर्दी, नाइट विजन दूरबीन, मेटल डिटेक्टर, एंड्राइड फोन, लाइव किट, खोजी कुत्ता, ड्रोन, रात के उपयोग के लिए लाइट, मशाल, सबूत संग्रह के लिए फारेंसिक किट, एंटी-पोचिंग, जंगल युद्ध के लिए टीएनएसटीएफ केंद्र में प्रशिक्षण, खुफिया पूछताछ और अपराध दृश्य प्रबंधन के लिए जबलपुर में प्रशिक्षण, कानूनी प्रशिक्षण व वन्यजीव व्यापार के उचित उपयोग पर डब्लूडब्लूएफ से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कहते हैं अधिकारी
यूपी से सटा होने के कारण लैंसडौन वन प्रभाग संवेदनशील है। वन तस्करों और माफियाओं पर नकेल कसने के लिए एसओजी टीम का गठन किया जा रहा है। यह टीम वन तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के अलावा जंगल से सटे क्षेत्रों में अपने संपर्क बनाने का काम करेगी। डब्लूडब्लूएफ की मदद से जल्द इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- वैभव कुमार सिंह, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग