कोटद्वार। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते बच्चों पर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। आलम यह है कि सरकारी अस्पताल और निकटवर्ती स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले दो सप्ताह से पेंटा वैक्सीन नहीं है। लोग बच्चों को वैक्सीन लगाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंच रहे हैं, लेकिन टीका उपलब्ध न होने के कारण लोग अपने नौनिहालों को लेकर वापस लौट रहे हैं।
राजकीय संयुक्त चिकित्सालय और निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्र के एएनएम स्वास्थ्य केंद्रों में प्रत्येक बुधवार को नवजात शिशु को छोड़कर बाकी बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए पेंटा वैक्सीन और खसरे के टीके लगाए जाते हैं। खसरे के टीके को प्रदेश सरकार द्वारा अक्तूबर से सभी विद्यालयों में लगाए जाने वाला एमआर टीकाकरण के चलते पहले की बंद कर दिया है। वर्तमान में बच्चों के रोगों की रोकथाम के लिए पेंटा वैक्सीन के टीके लगाए जा रहे थे। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में पेंटा वैक्सीन के टीके 30 सितंबर को एक्सपाइरी हो जाने के बाद भी अभी तक नई डेट के टीके स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुंचाए गए हैं। क्षेत्र के सैकड़ों बच्चों पर गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
पिछले दो सप्ताह से अपने नौनिहालों को पेंटा वैक्सीन टीका लगाने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे पदमपुर निवासी हरिमोहन सिंह रावत, लकड़ी पड़ाव निवासी राम प्रसाद, गाड़ीघाट से सीमा कुकरेती व गोविंद नगर से पंकज शर्मा आदि को एक बार फिर से स्वास्थ्य कर्मियों ने वैक्सीन नहीं होने के कारण लौटा दिया है। इसके चलते लोग भड़क गए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग पर बच्चों को खतरे में डालने का आरोप लगाया। कहा कि पिछले दो सप्ताह पहले बच्चों को टीका लगाने की डेट थी, लेकिन सरकारी अस्पताल में टीका नहीं होने के कारण उन्हें वापस जाना पड़ रहा है। चेताया कि अगले हफ्ते टीका नहीं लगाए जाने पर सीएमएस का घेराव किया जाएगा।
उधर, अस्पताल के सीएमएस डा. आईएस सामंत ने बताया कि पेंटा वैक्सीन टीकाकरण राष्ट्रीय योजना है। अभी तक उन्हें केंद्र से वैक्सीन उपलब्ध नहीं हुए हैं। वैक्सीन पहुंचने पर बच्चों का टीकाकरण शुरू किया जाएगा।