कोटद्वार। कोटद्वार नगर निगम के चुनाव में मेयर और पार्षद पद पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर न होने समेत अन्य कारणों से बड़ी संख्या में रद्द हुए वोटों से खफा मेयर पद की प्रत्याशी विभा चौहान और कई पार्षद प्रत्याशी निर्वाचन प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। मेयर और पार्षद प्रत्याशी सोमवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि मेयर पद पर जीत के अंतर की अपेक्षा रद्द मतों की संख्या दोगुनी होने पर सवाल उठने लाजिमी हैं।
40 वार्डों वाली कोटद्वार नगर निगम के लिए गत 18 नवंबर को चुनाव हुए थे। मतदान के दिन धीमी निर्वाचन प्रक्रिया के चलते आधे से अधिक मतदान केंद्रों पर रात साढ़े दस बजे तक मतदान होता रहा। धीमी गति से हुए मतदान पर तब प्रत्याशियों और मतदाताओं की ओर से सवाल उठाए गए थे। 20 नवंबर को राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार में हुई मतगणना में कई कारणों से सैकड़ों मतपत्र अवैध घोषित कर दिए गए। इसमें ज्यादातर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर न होने से रद्द हुए। निर्वाचन आयोग की ओर से कोटद्वार नगर निगम में मेयर पद के 3285 मत और 40 वार्डों के पार्षदों की मतगणना में 2852 मत रद्द करने की जानकारी दी गई। इस पर निर्दलीय प्रत्याशी विभा चौहान के पति धीरेंद्र चौहान, वार्ड नंबर-22 सिमलचौड़ के पार्षद प्रत्याशी सुधीर कुमार समेत कई प्रत्याशियों ने कड़ा एतराज जताते हुए हंगामा किया। उन्होंने एडीएम/रिटर्निंग अधिकारी रामजी शरण शर्मा से शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मेयर पद की निर्दलीय प्रत्याशी विभा चौहान के पति धीरेंद्र चौहान और उनके समर्थक प्रवीन पुरोहित ने बताया कि मेयर पद पर जीत के अंतर की अपेक्षा रद्द मतों की संख्या दोगुनी है। ऐसे में अवैध मतों को लेकर निर्वाचन की प्रक्रिया पर हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। पार्षद प्रत्याशी सुधीर कुमार ने बताया कि इस संबंध में अन्य कई पार्षद प्रत्याशियों से बात की जा रही है। सोमवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।