कोटद्वार। परिवहन विभाग की सख्ती से खफा ऑटो यूनियन से जुड़े वाहन चालकों और मालिकों के प्रतिनिधिमंडल ने तहसील में एसडीएम कमलेश मेहता से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि कोटद्वार और भाबर क्षेत्र में ऑटो थ्री प्लस वन की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। इस क्षेत्र में ऑटो से आवाजाही करने वालों में स्कूली बच्चे होते हैं। यूनियन के पदाधिकारियों की मांग पर एसडीएम ने परिवहन और पुलिस अधिकारियों को दफ्तर में बुलाकर उनकी वार्ता कराई, लेकिन वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला।
सिद्धबली ऑटो एसोसिएशन से जुड़े ऑटो मालिक और चालकों ने मंगलवार को तहसील पहुंचकर एसडीएम को अपनी दिक्कत बताई। वाहन चालकों ने कहा कि 12 जुलाई की बैठक में परिवहन विभाग ने ऑटो में तीन से अधिक सवारी बिठाने पर चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी है, जो कोटद्वार भाबर के संदर्भ में कतई व्यावहारिक नहीं है।
परिवहन कर अधिकारी शशि दुबे ने कहा कि नियमानुसार ऑटो तीन सीट में पास है, लेकिन चालकों द्वारा ड्राइवर सीट में भी एक अतिरिक्त सवारी बिठाई जा रही है। नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोतवाल उत्तम सिंह जिमिवाल ने कहा कि शासन ने काउंटर चेकिंग करने के निर्देश दिए हैं, ऐसे में शिथिलता प्रदान करना संभव नहीं है। इसके बाद अधिकारियों और वाहन चालकों में गहमागहमी बनी रही। एसडीएम ने कहा कि शासन की ओर से तय नियमों के अनुसार ही ऑटो का संचालन होना चाहिए। चालकों ने कहा कि वे नियमानुसार ही जनता से किराया वसूलेंगे और यदि जनता इसका विरोध करती है तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। वार्ता के दौरान एसोसिएशन के संरक्षक जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला, अध्यक्ष सतेंद्र सिंह रावत, उपाध्यक्ष अशोक चौहान, सचिव स्वयंबर प्रसाद, परमवीर, धनवीर, सुनील, पंकज, सत्यपाल, अनूप, रवींद्र, संजय सिंह, मनोज ध्यानी, रमेश सिंह व नरेंद्र कुमार वर्मा शामिल रहे।
ऑटो चालकों के समर्थन में आए अभिभावक
कोटद्वार। ऑटो चालकों के समर्थन में स्कूली बच्चों के अभिभावक भी खुलकर आ गए गए हैं। अभिभावकों ने पुलिस और प्रशासन से स्कूली बच्चों को लाने ओर ले जाने वाले ऑटो चालकों को परेशान न करने की मांग की है। निंबूचौड़ निवासी अनीता देवी, खूनीबड़ निवासी रेखा देवी, कुंभीचौड़ निवासी प्रीति देवी और ज्योति रावत ने कहा कि ऑटो चालक अब बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए पांच सौ रुपये के बजाय दो हजार रुपये महीना किराया मांग रहे हैं।
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