कोटद्वार। लगातार दो साल से आपदा से जूझ रहे कोटद्वार और भाबर के गांवों (अब नगर निगम) की कोई सुध नहीं ले रहा है। चार महीने बाद फिर से बरसात का सीजन शुरू होने वाला है, लेकिन शासन और प्रशासन की ओर से पिछली आपदाओं से कोई सबक नहीं लिया जा रहा है। खोह नदी, पनियाली गदेरा, सुखरो, ग्वालगढ़, मालन व तेलीस्रोत से लेकर सिगड्डी स्रोत तक करीब एक लाख की आबादी आपदा के मुहाने पर बैठकर बाढ़ सुरक्षा कार्यों के होने का इंतजार कर रही है, लेकिन दो साल बाद भी हालात जस के तस हैं।
वर्ष 2017 के 3/4 अगस्त की रात कोटद्वार के जंगलों में बादल फटने से जहां भाबर के करीब 40 से अधिक गांव आपदा से प्रभावित हुए, वहीं कोटद्वार में पनियाली गदेरे ने शहर से लेकर गांव तक लोगों को गहरे जख्म दिए। आपदा में सैकड़ों परिवार कई दिनों तक राहत शिविरों में रहे। मुख्यमंत्री से लेकर तमाम राजनेता कोटद्वार आए, बैठकें चलीं, भाषण दिए और बाढ़ प्रभावितों के लिए बड़ी घोषणाएं हुईं। लोगों को भरोसा दिलाया गया कि अगले साल उन्हें यह नहीं झेलना पड़ेगा। मोटाढांक के देवरामपुर से लेकर नंदपुर, पदमपुर, कोठला, मवाकोट और गोरखपुर के काश्तकारों की उपजाऊ भूमि मालन नदी ने लील ली। ग्वालगढ़ गदेरे ने मवाकोट, सत्तीचौड़ से लेकर निंबूचौड़ और सिमलचौड़ तक दोनों ओर तबाही मचाई। आननफानन में सरकारी विभागों से काम कराए गए, आगणन तैयार कराए गए, लेकिन पैसा नहीं मिला। वर्ष 2017 की आपदा में 14.86 करोड़ रुपये के आगणन बाढ़ सुरक्षा प्रबंध के भेजे गए। इसमें से 3.23 करोड़ रुपये के काम उधार में विभाग ने करा भी दिए, लेकिन जब शासन से पैसा मिलने की बात आई तो मात्र 48 लाख रुपये का भुगतान हुआ। इसमें भी सिंचाई विभाग ने करीब 66 लाख रुपये अपनी आकस्मिक धनराशि से लगा दिए। करीब पंद्रह करोड़ के जो आगणन भेजे गए थे, वे आज भी फाइलों में धूल फांक रहे हैं।
शासन और प्रशासन की नींद फिर ठीक सालभर बाद 25 अगस्त, 2018 को तब खुली, जब पहले से ही आपदा के मुहाने पर बैठे कोटद्वार के गली मोहल्ले से लेकर सनेह और सिगड्डी तक की नदियां उफनाकर बहने लगीं। नदियों की बाढ़ ने फिर कहर बरपाया। खेत, खलियान, सिंचाई नहरें बाढ़ की चपेट में आ गईं। करीब एक हजार से अधिक लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। इस बार भी दिखावे का आपदा प्रबंधन चला, कई घर, खेत खलिहान टूटकर नदियों में समा गए। फिर से आगणन बनाए गए, लेकिन शासन से धेला नहीं मिला। ये गांव अब नगर निगम में शामिल हो गए। बाढ़ की चपेट में आए खेत, खलिहान और टूटी नहरों की सुध न लेने से काश्तकार आज भी बाढ़ सुरक्षा के इंतजामों की राह ताक रहे हैं।
बाढ़ सुरक्षा प्रबंधों के लिए आगणन बनाकर शासन को भेजे गए हैं। बजट उपलब्ध होने पर काम शुरू करा दिए जाएंगे।
-सीपी भट्ट, एसडीओ सिंचाई कोटद्वार
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