कोटद्वार। चाई ग्रामोत्सव के अंतिम दिन ग्रामीणों ने जहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा बिखेरी, वहीं किशन महिपाल के लोकगीतों पर लोग खूब झूमे। समारोह के बाद भजन और भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान पर्वतीय क्षेत्र में स्थित गांव और ग्राम्य संस्कृति बचाने के विषय पर विचार गोष्ठी हुई, जिसमें वक्ताओं ने गांव के संरक्षण में अपने सुझाव दिए।
जयहरीखाल के चाई गांव में आयोजित तीन दिवसीय चाई ग्रामोत्सव के अंतिम दिन आयोजित विचार गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तराखंड के मनोनीत विधायक जार्ज इवान ग्रेगरी मैन ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि चाई गांव अपनी अनूठी पहल के कारण पूरे राज्य और देश के लिए अहम भूमिका निभा रहा है। गांव बचाने के लिए सभी लोगों को सबसे पहले अपने गांव आना होगा। कहा कि गांव से जुड़ी मौलिक पहचान कायम रखें। गांव भारतीय सभ्यता और संस्कृति के केंद्र हैं। विशिष्ट इंजीनियर आनंद ध्यानी ने गांव बचाने के लिए नई पीढ़ी को गांव से जोड़ने की अपील की। कहा कि इससे रोजगार की नई राह निकलेगी और गांवों का विकास होगा।
ग्रामोत्सव में लोक गायक किशन महिपाल ने एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया। वहीं लोक कलाकार सोनू की नृत्य प्रस्तुतियों को भी दर्शकों ने खूब सराहा। समारोह में ग्रामीण युवतियों ने गढ़वाली लोक नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।
इस मौके पर जगमोहन बुड़ाकोटी, प्रेम बुड़ाकोटी, सच्चिदानंद, डा. पदमेश्वर बुड़ाकोटी, महेंद्र बुड़ाकोटी, संजय बड़ोनी, ललन बुड़ाकोटी व डा. पदमेश्वर बुड़ाकोटी आदि मौजूद रहे।
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