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राजस्व विभाग: आपदा, गैस वितरण, खतौनी में गड़बड़ियों के मुद्दे छाए रहे

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कोटद्वार। अमर उजाला चौपाल में लोगों ने तहसीलदार के समक्ष राजस्व विभाग के साथ ही कुकिंग गैस की किल्लत, गैस वितरण में अव्यवस्थाएं, कंप्यूटरीकृत खतौनियों में गड़बड़ियों, आपदा के आकलन का स्थलीय निरीक्षण न होने, लावारिस पशुओं की समस्याएं प्रमुखता से उठाईं। तहसीलदार सुनील राज ने जनता की समस्याओं का यथासंभव निराकरण करने का भरोसा दिलाया।
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भाबर के लोग जीएमवीएन की भाबर गैस एजेंसी की कार्यशैली से खासे नाराज दिखे। निंबूचौड़ से लेकर सिगड्डी और झंडीचौड़ तक के लोगों ने गैस वितरण में कुप्रबंधन की शिकायत की। कहा कि निर्धारित समय और प्वाइंट पर गैस नहीं मिलती। लोगों ने कहा कि उनके क्षेत्र में गैस की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। मुख्य मार्ग पर निर्धारित स्थलों पर गैस न मिलने से लोगों को गैस सिलेंडर सिर पर ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि वर्ष 2007 में खतौनियों को कंप्यूटरीकृत किया गया, लेकिन इस दौरान भारी अनियमितताएं बरती गईं। कंप्यूटरीकृत खतौनी में लोगों के रकवे शून्य दर्शाए गए हैं तो कई लोगों के नाम ही गलत अंकित कर दिए गए। कण्वाश्रम विकास समिति की महासचिव आभा डबराल ने पोस्ट आफिस और पटवारी चौकी का नाम कलालघाटी के नाम पर रखने पर ऐतराज जताया। कहा कि क्षेत्र का नाम कण्वघाटी होना चाहिए। गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय कण्वाश्रम के संस्थापक विश्वपाल जयंत ने कहा कि आपदा में उनके महाविद्यालय परिसर में भारी नुकसान हुआ है। बिना जांच के ही प्रशासन ने रिपोर्ट तैयार की। जशोधरपुर के लोगों ने स्टील प्लांटों से निकल रही जहरीले धुएं से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर होने और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों की अनदेखी का मामला उठाया। तहसीलदार सुनील राज ने 2007 में कंप्यूटरीकृत खतौनियों में सुधार का भरोसा दिलाया। कुकिंग गैस के वितरण के संबंध में उन्होंने जल्द ही बैठक कर समस्या का समाधान करने की बात कही। कहा कि फैक्ट्रियों के प्रदूषण के बारे में जिलाधिकारी के माध्यम से कार्रवाई करवाई जाएगी।
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