कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग के जंगल से सटे मार्गों पर मॉर्निंग और इवनिंग वाक करना महंगा पड़ सकता है। आजकल हाथियों का मस्तकाल चल रहा है। ऐसे में हाथी अपनी शांति में खलल डालने वालों पर हमला कर सकते हैं। वन विभाग ने लोगों को जंगल से सटे मार्गों पर पैदल नहीं चलने की चेतावनी दी है।
43327 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले लैंसडौन वन प्रभाग का अधिकतर क्षेत्र हाथी बाहुल्य है। अक्तूबर से फरवरी माह तक हाथी का मस्तकाल रहता है, जंगल में अथवा उसके क्षेत्र में मानव का हस्तक्षेप करने पर टस्कर क्रोधित हो जाता है। विगत वर्ष इन दिनों हाथी कई लोगों को दौड़ा चुका है। ऐसे में जंगल के नजदीक जाने में खतरा हो सकता है।
जंगल से सटे कोटद्वार-दुगड्डा राजमार्ग पर डीएफओ कार्यालय से पांचवें मील की नर्सरी तक अक्सर हाथी सड़क क्रॉस कर अन्य बीटों में आवागमन करते हैं। सनेह रोड पर ग्रास्टनगंज से आगे पूरा हाथी बाहुल्य क्षेत्र है। झंडीचौड़ के यूपी सीमा क्षेत्र, कुंभीचौड़, रामनगर और लालपानी क्षेत्र के अलावा रामणी-पुलिंडा मार्ग इन स्थानों में हर वक्त हाथियों की मौजूदगी बनी रहती है। ऐसे में इन मार्गों पर जाना खतरे से खाली नहीं है। खतरे को देखते हुए वन विभाग ने इन क्षेत्रों को डेंजर जोन घोषित कर रखा है।
कोटद्वार रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल ने बताया कि हाथी मस्तकाल के दौरान एकांत पसंद करता है। ऐसे में अगर कोई उसके कॉरिडोर में दखल देकर शांति भंग करता है तो वह आक्रोशित हो जाता है। इन दिनों सुबह और शाम हाथी बाहुल्य क्षेत्र में टहलना खतरे से खाली नहीं है।
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