कोटद्वार। शहर में अधिकारियों के न होने से तहसील में सन्नाटा पसरा हुआ है। दूरदराज से काम के लिए तहसील आने वाले लोग बैरंग लौट रहे हैं।
पौड़ी जिले की सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण कोटद्वार तहसील में तैनात एसडीएम मनीष कुमार सिंह को केदारनाथ धाम में चारधाम यात्रा के मद्देनजर यात्रा मजिस्ट्रेट बनाकर भेजा गया है। वह पांच जून को ही कोटद्वार से रवाना हो गए थे। उनका प्रभार लैंसडौन की एसडीएम को सौंपा गया है, लेकिन वह एक दिन के लिए भी कोटद्वार तहसील में नहीं बैठीं। तहसीलदार का पद खाली चल रहा है। उनका काम चलाने के लिए नायब तहसीलदार डबल सिंह रावत को प्रभारी तहसीलदार बनाया गया है, लेकिन वह भी स्वास्थ्य और अन्य कारणों से कोटद्वार से बाहर गए हैं। तहसील में काम कराने गए लोगों ने जब तहसीलदार के बारे में पूछा तो उन्हें उनके जरूरी कार्य से देहरादून जाने की बात कही गई।
तहसील में भले ही दो नायब तहसीलदार के पद सृजित हैं, लेकिन उनके लिए मुख्य भवन में बैठने तक के लिए कक्ष आवंटित नहीं किया गया है। हाल ही में लैंसडौन से कोटद्वार स्थानांतरित हुए नायब तहसीलदार कुलदीप रावत को कानूनगो कक्ष में बैठकर काम चलाना पड़ रहा है। भाबर के मंगल सिंह, चंद्रशेखर व मनोहर काला का कहना है कि मंगलवार को तहसील में कोई अधिकारी नहीं रहने से तहसील में सन्नाटा पसरा रहा। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आनंद रतूड़ी भी आयोग में एक अपील की सुनवाई में गए हुए थे। अधिकारियों के नहीं होने से मूल निवास, जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र समेत विभिन्न कार्यों से तहसील पहुंचे लोगों को बैरंग लौटने को मजबूर होना पड़ा। कुंभीचौड़ निवासी अंजू पुंडीर का कहना है कि तहसील में अधिकारी न होने से लोगों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
कोटद्वार तहसील पौड़ी जिले की सबसे अधिक संवेदनशील तहसील है। यहां पर काम का सबसे अधिक दबाव रहता है। ऐसे में यहां के एसडीएम की अन्यत्र ड्यूटी नहीं लगाई जानी चाहिए। जिलाधिकारी से इस मामले में बात हुई है। उन्होंने इसे मंडलायुक्त का आदेश बताया है। शासन स्तर पर यह बात उठाई जा रही है। जल्द ही व्यवस्था बनाई जाएगी।
-डा. हरक सिंह रावत, क्षेत्रीय विधायक एवं वन मंत्री उत्तराखंड सरकार
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