कोटद्वार। उत्तराखंड सरकार और सीतापुर नेत्र चिकित्सालय ट्रस्ट के बीच ट्रामा सेंटर के निर्माण के लिए भूमि देने के मामले में हुए समझौते का अनुपालन न होने के मामले में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) न्यायालय ने राज्य सरकार को एक माह के भीतर यह मामला निस्तारित करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि यदि राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में जिलाधिकारी पौड़ी एक माह के अंदर नेत्र अस्पताल की भूमि हस्तांतरण मामले में कोई कार्रवाई नहीं करते हैं तो न्यायालय स्वयं अपने स्तर पर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर देगा।
सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के अधिवक्ता धर्मदीप अग्रवाल और अंकित अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार को जब कोटद्वार में ट्रामा सेंटर निर्माण के लिए भूमि नहीं मिल रही थी, तब सरकार ने राजकीय संयुक्त चिकित्सालय से सटे सीतापुर नेत्र चिकित्सालय ट्रस्ट से संपर्क साधा। ट्रामा सेंटर के लिए करीब 10 हजार वर्ग फीट जमीन की आवश्यकता थी। तब राज्य सरकार ने पांच अप्रैल, 2013 को सरकार ने ट्रस्ट के साथ एक लिखित समझौता किया था। इसके तहत ट्रामा सेंटर के लिए दी जाने वाली भूमि पर बने नेत्र अस्पताल के टाइप-टू और टाइप-फोर के पुराने भवनों को गिरा दिया जाएगा और उनके बदले नए भवन ट्रस्ट की भूमि पर बनाकर राज्य सरकार देगी। समझौते में यह भी तय हुआ कि ट्रस्ट की शेष 38148 वर्ग फीट भूमि को विधिवत रूप से सीतापुर नेत्र चिकित्सालय के नाम हस्तांतरित कर दिया जाएगा और उक्त भूमि से कभी भी ट्रस्ट को बेदखल नहीं किया जाएगा। इस बीच राज्य सरकार ने ट्रामा सेंटर का निर्माण तो कर दिया, लेकिन समझौते की अन्य शर्तों का अनुपालन नहीं किया। इसके कारण ट्रस्ट को 12 अप्रैल, 2017 को सक्षम न्यायालय में ईजराय वाद दायर करना पड़ा। तब से न्यायालय में इस मामले की सुनवाई चल रही थी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से भूमि हस्तांतरण के मामले में उदासीनता बरती जाती रही। इस पर सिविल जज सीनियर डिवीजन इंदु शर्मा की अदालत ने इस मामले को एक माह के भीतर निस्तारित करने के आदेश राज्य सरकार को दिए हैं।