कोटद्वार/सतपुली। नगर निगम चुनाव में पार्टी से बगावत कर मेयर का चुनाव लड़ने वाले कोटद्वार के तीन बागी नेताओं को भाजपा प्रदेश हाईकमान ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। निष्कासन के निर्णय को बागी नेताओं ने शिरोधार्य करते हुए इसे पार्टी का ही नुकसान बताया। कहा कि वे जीवन पर्यंत पार्टी के लिए समर्पित रहे, लेकिन जब वक्त आया तो पार्टी ने ही उनके साथ धोखा किया। कहा कि पूर्व में स्थापित पार्टी नेताओं की पत्नियों को टिकट थमाया जाना, महिला सशक्तिकरण का मजाक है।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल की ओर से भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धीरेंद्र चौहान, उनकी पत्नी विभा चौहान, पूर्व पालिकाध्यक्ष शशि नैनवाल और निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य सुधा सती को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है। अपने निष्कासन की खबर लगते ही पूर्व जिलाध्यक्ष धीरेंद्र चौहान ने कहा कि पार्टी हाईकमान चाहे जो निर्णय ले, वे जीवन पर्यंत कार्यकर्ता बने रहेंगे। पार्टी ने उनके साथ धोखा किया है। विधानसभा चुनाव में वे प्रबल दावेदार थे, लेकिन टिकट नहीं दिया। इसके बाद नगर निगम में भी धोखा किया। निष्कासन पर उन्हें कोई शिकवा नहीं है।
निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य और वरिष्ठ नेत्री सुधा सती ने कहा कि उन्होंने पार्टी को अपने जीवन के महत्वपूर्ण चालीस साल दिए। हमेशा पार्टी के लिए समर्पित भाव से कार्य किया, लेकिन पार्टी ने उनकी लगातार अनदेखी की। पार्टी के फैसले का नुकसान पार्टी और कोटद्वार की जनता को उठाना पड़ेगा। पूर्व पालिकाध्यक्ष शशि नैनवाल का कहना है कि पार्टी द्वारा कोटद्वार में पूर्व में स्थापित राजनेताओं की पत्नी को मेयर का प्रत्याशी बनाना परिवारवाद को बढ़ावा देना है। यह निर्णय पार्टी के लिए आत्मघाती साबित होगा। पार्टी के लिए वर्षों से काम कर रहीं महिलाओं को ही टिकट मिलना चाहिए था।
उधर, सतपुली में पार्टी से बागी होकर चुनाव लड़ने वाले जगदंबा डंगवाल और मीनू डंगवाल को भी पार्टी ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। इन दोनों नेताओं ने कहा कि जिस दिन प्रत्याशियों की सूची जारी की गई थी, उसी दिन उन्होंने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया था।