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तहसील में जनसुनवाई होने से गुस्साए ग्रामीणों ने काटा हंगामा

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कोटद्वार। कोटद्वार-भाबर क्षेत्र के 73 गांवों को मिलाकर नगर निगम बनाने के लिए जनसुनवाई के अंतिम दिन ग्रामीणों ने जिला प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए जिला स्तरीय समिति के समक्ष जमकर हंगामा काटा। उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर तहसील में एक भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई। लोगों ने गांव में जाकर सुनवाई नहीं होने पर आंदोलन और कोर्ट जाने की दी चेतावनी है।
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बुधवार को जिला प्रशासन द्वारा सुनवाई का एक दिन बढ़ाए जाने की सूचना मिलते ही ग्रामीण तहसील में एकत्र होना शुरू हो गए। तहसील सभागार में एडीएम रामजीशरण शर्मा की अध्यक्षता में जनसुनवाई का कार्य शुरू होते ही ग्रामीण भड़क गए। उन्होंने तहसील में जन सुनवाई का विरोध करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने तहसील परिसर से सभा कक्ष तक नगर निगम मुर्दाबाद, एडीएम वापस जाओ, सरकार की तानाशाही नहीं चलेगी जैसे नारे लगाकर जमकर हंगामा काटा। उन्होंने दोपहर बाद तक जनसुनवाई की कार्रवाई नहीं चलने दी। ग्रामीणों ने एडीएम के समक्ष एक हाल में जनसुनवाई का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सभी ग्रामीण तहसील में नहीं आ सकते, इसलिए जनसुनवाई ग्राम पंचायत स्तर पर होनी चाहिए।
नगर निगम विरोध संघर्ष समिति ने भी तहसील में जनसुनवाई का विरोध जताया। उपाध्यक्ष प्रवेंद्र रावत ने चेताया कि अगर तहसील में जनसुनवाई की गई तो समिति प्रशासन के विरोध में आंदोलन शुरू कर देगी। उत्तराखंड आंदोलनकारी राष्ट्रीय मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय ध्यानी और उपाध्यक्ष राजाराम अंथवाल ने कहा कि हाई कोर्ट द्वारा नगर निगम के नोटिफिकेशन को रद्द किए जाने के बाद ग्राम पंचायतें अपने अस्तित्व में आ गई हैं, लेकिन नगर पालिका में अभी भी नगर निगम का बोर्ड लगा हुआ हैै। उत्तराखंड क्रांति दल के सैनिक प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष श्रवण सिंह रावत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
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इस अवसर पर ग्राम पंचायत शिब्बूनगर के प्रधान डबल सिंह रावत, चंद्रप्रकाश नैथानी, गोविंद डंडरियाल, सूरज प्रसाद कांती, विजयपाल मेहरा आदि मौजूद थे।
उधर, एडीएम रामजीशरण शर्मा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार कोटद्वार में दो दिन की जनसुनवाई की गई। इसमें उनके पास लिखित रूप से 5554 लिखित आपत्तियां दर्ज की गईं। 13 लोगों ने जनसुनवाई में अपनी बात रखी है। आगे की कार्रवाई जिलाधिकारी के निर्देश पर की जाएगी।

इंसेट
भाजपा जिलाध्यक्ष और पुलिस के पहुंचने पर भड़के ग्रामीण
तहसील सभागार में उस समय हंगामा बढ़ गया, जब भाजपा के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह बिष्ट जनसुनवाई कक्ष में पहुंच गए। लोगों ने जिलाध्यक्ष का विरोध करना शुरू कर दिया। इसके चलते जिलाध्यक्ष को अपने समर्थकों के साथ तहसील सभागार से जाना पड़ा। जिलाध्यक्ष के जाने के बाद सभागर में पुलिस पहुंच गई। लोग पुलिस को देखते ही भड़क गए। उन्होंने पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। एडीएम ने बिना बुलाए पुलिस कर्मियों के सभागार कक्ष में आने पर नाराजगी जताई और पुलिस कर्मियों को सभागार कक्ष से बाहर जाने के निर्देश दिए, तब जाकर माहौल शांत हुआ।
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