शिक्षा विभाग ने इस विद्यालय को वर्ष 1973 में जूनियर हाईस्कूल, 1985 में हाईस्कूल और वर्ष 2000 में राजकीय इंटर कालेज के रूप में उच्चीकृत तो कर दिया, लेकिन, न तो पुराने भवनों की मरम्मत कराई और न ही इंटर कक्षाओं के लिए नया भवन ही बनाया। विभागीय उपेक्षा से क्षुब्ध हो अभिभावकों ने श्रमदान और चंदा एकत्र कर इंटर कालेजों के लिए कक्षों का निर्माण कराया, लेकिन विभाग की लगातार अनदेखी के कारण वे भवन भी जर्जर हो गए। इस वक्त विद्यालय के पांच कक्षा कक्ष जर्जर हाल में हैं, जहां बच्चे शिक्षा नहीं लेते हैं। जगह की कमी के कारण बरामदे और खुले आसमान के नीचे कक्षाएं चल रही हैं।
कहते हैं अभिभावक
अभिभावक संघ के अध्यक्ष हरेंद्रसिंह बिष्ट, ढंगलगांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मनवर सिंह रावत ने शिक्षा विभाग पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि विद्यालय की बदहाली के कारण बच्चे खतरे की जद में शिक्षा ले रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायत की गई, लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
ग्रामीणों द्वारा बनाए गए भवन की रजिस्ट्री विभाग के नाम नहीं होने के कारण भवन के लिए बजट मिलने में दिक्कत आ रही है, विभाग के नाम रजिस्ट्री होते ही रमसा के तहत विद्यालय भवन की मरम्मत की जाएगी।
- डा. राम निवास, बीईओ नैनीडांडा