यमकेश्वर। किसानों के खेतों को पर्याप्त पानी पहुंचाकर खेती को बढ़ावा देने के दावे करने वाले सिंचाई विभाग की पोल खोल रहे हैं यमकेश्वर ब्लाक के बंजर पड़े उपजाऊ खेत। यहां विभागीय लापरवाही के चलते पिछले चार साल से नहर में पानी नहीं आया है। इसके चलते गेहूं और धान से लहलहाने वाले खेतों में अब लैंटाना की झाड़ियां उग आई हैं।
अगस्त 2014 में यमकेश्वर में हुई भीषण बारिश से आई दैवीय आपदा के कारण अपर सीला नहर (सीला सप्लीमेंटरी नहर) क्षतिग्रस्त हो गई थी। सिंचाई नहर के क्षतिग्रस्त होने से माला, राजसेरा, ठांगर, पंचूर, ठिंगाबांज, मलेथा, जैरसारी व हरसोली आदि गांवों की करीब 600 नाली से अधिक की सिंचित भूमि बंजर हो गई है। वर्तमान में आलम यह है कि जिन खेतों में धान और गेहूं की अच्छी फसल होती थी, वहां लैंटाना की झाड़ी और जंगली घास उगने लगी है। चार साल बीत जाने के बाद भी सिंचाई विभाग नहर की मरम्मत को लेकर गंभीर नहीं है।
ग्रामीण शांतनु बडोला, कांता प्रसाद, संतोष बडोला, सुभाष बड़ोला, सुरेश बडोला, रमेश बड़ोला, हेमंत बडोला, विनोद सिंह, दिनेश चंद्र, भारत सिंह, बचन सिंह व पुष्पा देवी ने सिंचाई विभाग पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि छह जून 2017 को यमकेश्वर में आयोजित तहसील दिवस पर जिलाधिकारी सुशील कुमार को शिकायत करने के बाद उन्होंने विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक नहर पर काम नहीं हुआ है।
उधर, सिंचाई विभाग के अवर अभियंता अमित घिल्डियाल ने बताया कि नहर के लिए जिला योजना के अंतर्गत बजट आया है, लेकिन अन्य नहरों में मरम्मत कार्य अधिक होने के कारण सीला नहर का कार्य नहीं हो सका है। शीघ्र सीला सप्लीमेंटरी नहर का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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