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कवि सम्मेलन में कवियों ने दिया सामाजिक समरसता का संदेश

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कोटद्वार। दीपावली के अवसर पर साहित्यिक संस्था ‘साहित्यांचल’ की ओर से देवीरोड स्थित एमकेवीएन स्कूल में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने राष्ट्र प्रेम से ओत-प्रोत अपनी रचनाएं सुनाकर सामाजिक समरसता बढ़ाने का संदेश दिया।
कवि सम्मेलन का उद्घाटन कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. ख्यात सिंह चौहान ‘ख्याली’, डॉ. आरपी ध्यानी, डॉ. एनके ढौंडियाल ‘अरुण’, चक्रधर शर्मा ‘कमलेश’ और प्रकाश चंद्र कोठारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कवियों ने अपनी कविताओं की प्रस्तुतियां दीं। रिद्धि भट्ट ने ‘एक ईमान का, एक किसान का और एक जवान के नाम से दीप जले, तो प्रगति के रॉकेटों पर चढ़ उन्नति की फुलझड़ियां जले’, एसपी कुकरेती ने ‘दीप से जले हम दूसरों के लिए, रोशनी सी बिछे हम पीड़ितों के लिए’, एलके बुड़ाकोटी ने ‘उसने घर में कभी किसी पीड़ा की कमी नहीं देखी, अपनी आंखों में कभी नमी नहीं देखी’ कविताएं सुनाईं। सम्मेलन में कर्नल बीबी ध्यानी (रि.) ने देश रक्षा में तैनात सैनिकों के शौर्य पर कविता सुनाई। पूर्व डीआईजी बीएस नेगी ने ‘समझो मानव तुम जीवन का सार’ की पंक्तियों के साथ माहौल को सराबोर कर दिया। डॉ. विलास बुड़ाकोटी ने ‘घर में मेहमानों का आना-जाना हो, खुशहाली हो, दिवाली हो, महेशानंद गौड़ ‘चंद्रा’ ने एक दरिया है, बहता जाए, समय रुके न चलता जाए’ कविता की प्रस्तुतियां दी।
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सम्मेलन मेें अनुसूया प्रसाद डंगवाल की ‘अंशु का घर जले तो जले, लोग सब रोशनी में नहाए’ कविता ने खूब वाहवाही लूटी। इस मौके पर डॉ. नंदकिशोर खंडू़ड़ी, जेपी धस्माना, प्रवेश नवानी, राकेश ध्यानी, सुभाष नौटियाल, मयंक प्रकाश कोठारी, दीपक जदली, डॉ. केएस चौहान, मोहनी नौटियाल और कौशल्या जखमोला आदि मौजूद थे।
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