कोटद्वार। तीन दिन से कोटद्वार शहर एक तरह से बारूद के ढेर पर है। आगजनी के खतरे को देखते हुए शहर के संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी आतिशबाजी की दुकानें खुली हैं। शहर में पटाखों की दुकानें खोलने के लिए लाइसेंस तो सिर्फ 166 दिए गए, लेकिन दुकानों की संख्या दो हजार के पार है। पुलिस प्रशासन भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर रहा है। आतिशबाजी की दुकानों के लिए बनाए गए कायदे-कानून और मानक धरातल पर नहीं दिखे। अलबत्ता, पुलिस-प्रशासन अवैध तरीके से शहर में जहां-तहां लगीं आतिशबाजी की दुकानों की चौकसी जरूर करता नजर आया। पुलिस-प्रशासन की ओर से कोटद्वार तहसील के लिए पटाखों की दुकानों के 166 लाइसेंस जारी किए गए थे, लेकिन शहर और आसपास के इलाकोंमें ही पटाखे की दुकानों की संख्या दो हजार के पार है।
दिवाली के पर्व के लिए ट्रैफिक, आतिशबाजी की दुकानें और अन्य व्यवस्थाओं के लिए चार दिन पहले कोतवाली में बुलाई गई व्यापारियों और शहरवासियों की बैठक में लिए गए निर्णय धरातल पर नहीं उतर सके। झंडाचौक, स्टेशन रोड, बदरीनाथ मार्ग, नजीबाबाद मार्ग, गोखले मार्ग, उमानंद बड़थ्वाल मार्ग, देवीरोड समेत शहर की छोटी-बड़ी गलियों में धड़ल्ले से पटाखों की दुकानें सजी रहीं। भाबर रोड पर सिताबपुर से सिमलचौड़, निंबूचौड़, दुर्गापुर, मोटाढाक, हल्दूखाता, किशनपुर और कलालघाटी में लगी आतिशबाजी की दुकानें इस संख्या से अलग है। पुलिस-प्रशासन की ओर से आतिशबाजी के दुकानदारों को लालबत्ती चौक पर गाड़ी-पड़ाव में दुकानों के लाइसेंस जारी किए गए, लेकिन पटाखा व्यापारियों ने पुलिस, प्रशासन और फायर बिग्रेड की एक नहीं सुनी।
कोट
क्षेत्र में 166 दुकानों के लिए लाइसेंस देने के लिए संस्तुति की गई है। अवैध दुकानों पर कार्रवाई का अधिकार उन्हें नहीं है। उनका काम केवल आग बुझाना है। -रक्षपाल सिंह, अग्निशमन अधिकारी आर्य
पटाखों की दुकानों के लाइसेंस पुलिस और फायर बिग्रेड की संस्तुति के आधार पर दिए गए हैं। -राकेश तिवारी, एसडीएम
वर्ष 2014 के अग्निकांड से भी नहीं लिया सबक
दिवाली पर सुरक्षा इंतजामों को सख्ती से लागू करने का दावा करने वाले पुलिस प्रशासन ने वर्ष 2014 में छोटी दिवाली की रात को हुए अग्निकांड से भी सबक नहीं लिया। तीन साल पहले स्टेशन रोड पर बाजार चौकी के पास पटाखे की चिंगारी से लगी आग में एक पटाखे की दुकान, एक कार और बाइक जलकर स्वाहा हो गए थे। पास में ही पेट्रोल पंप भी था। अग्निकांड के बाद देर से मौके पर पहुंची फायर बिग्रेड के वाहन पर गुस्साएं लोगों ने तोड़फोड़ की थी। उस घटना के बाद से शहर के झंडाचौक में फायर बिग्रेड का एक वाहन खड़ा किया जाता है, लेकिन हर गली में इस वाहन की पहुंच संभव नहीं है।