कोटद्वार। राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार कभी भी ठप हो सकता है। अस्पताल के पास रूटीन मेंटेनेंस के लिए एक धेला नहीं है। चालू वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृत 3.80 करोड़ के बजट के सापेक्ष अस्पताल प्रबंधन को एक पैसा तक नहीं मिला है। हाल यह है कि जनरेटरों के लिए डीजल खरीदने से लेकर, धुलाई, भोजन, बिजली खर्च, अस्पताल की सफाई और जरूरी रखरखाव करना भी भारी पड़ रहा है। ऐसे में ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और आपरेशन थियेटर की व्यवस्थाओं को भी संचालित नहीं किया जा सकेगा।
गत अप्रैल माह में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित सरकारी अस्पताल की संचालन समिति की बैठक में चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 3.80 करोड़ का बजट पारित किया गया था। छह माह बीत चुके हैं, लेकिन अस्पताल को इस बजट में से एक धेला तक नहीं मिला। पिछले साल की बचत में से बचे पैसे का उपयोग होने के बाद अब अस्पताल को दवाई खरीद से लेकर साफ सफाई, भोजन, रूटीन लैब मेेंटेनेंस के लिए पैसे की जरूरत पड़ रही है। गत माह आई आपदा में कई दिन तक बिजली न होने के कारण दिन-रात चले जनरेटरों के डीजल के ही दो लाख रुपये बकाया हो चुके हैं। करीब 42 लाख रुपये दवाई खरीद, सात लाख बिजली बिल का बकाया, साढ़े पांच लाख रुपये लैब मेंटेनेंस, करीब 7.50 लाख सफाई, छह लाख भोजन और दो लाख रुपये धुलाई का बकाया चल रहा है। अस्पताल का नाम भले ही संयुक्त राजकीय चिकित्सालय है, लेकिन अस्पताल के भवन और व्यवस्थाएं बेस अस्पताल के समकक्ष चल रही हैं। बजट के अभाव में अस्पताल प्रबंधन पर करीब 50 लाख का बकाया चढ़ चुका है। ऐसे में अस्पताल की रूटीन मेंटेनेंस करना ही भारी पड़ने लगा है।
बजट के अभाव में रूटीन मेंटेनेंस के लिए शासन से बजट मांगा गया है। महानिदेशालय समेत उच्चाधिकारियों के संज्ञान में अस्पताल की समस्या लाई गई है। जल्द बजट रिलीज होने की उम्मीद है। - आईएस सामंत, सीएमएस संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार।