कोटद्वार। लगातार दो साल से कोटद्वार में आपदा का कहर बरपा रहे तीन किमी पनियाली गदेरे में करीब 130 लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। इससे नाले की चौड़ाई कम होने से बरसात में बाढ़ का पानी आबादी में घुसकर तबाही मचा रहा है। पिछले वर्ष जहां पनियाली की बाढ़ ने रिफ्यूजी कालोनी में चार लोगों की जान ली थी, वहीं इस साल भी आमपड़ाव में एक घर के ढहने से एक महिला की जान जा चुकी है। दो बार की आपदा के बाद हरकत में आए प्रशासन ने नाले पर अतिक्रमण चिह्नित करने और इसे सुखरो नदी में डायवर्ट करने के लिए सिंचाई विभाग को योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। विभाग की ओर से अतिक्रमण चिह्नित कर 130 लोगों की सूची स्थानीय प्रशासन को सौंप दी गई है। जल्द ही प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करेगा।
वर्ष 2017 में 3/4 अगस्त को भारी बारिश के बाद उफनाए पनियाली गदेरे ने शिवपुर से लेकर कौड़िया तक अपने दोनों की ओर आबादी को चपेट में लेते हुए व्यापक तबाही मचाई थी। आमपड़ाव में आर्मी कैंटीन को जमींदोज करते हुए एमटी कैंप में भी बड़ा नुकसान हुआ। मलबे में तब्दील रिफ्यूजी कालोनी के क्वार्टरों में चार लोगों की मौत हो गई थी। मानपुर, सिताबपुर, काशीरामपुर मल्ला और बालासौड़ में भी बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों को प्रभावित किया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद बाढ़ प्रभावितों से मिलने कोटद्वार आए थे। तब पनियाली गदेरे पर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हो सका। ठीक एक साल और 20 दिन बाद गत 25 अगस्त को फिर पनियाली गदेरे ने रौद्र रूप दिखाया। इस बार फिर अतिक्रमण हटाने और गदेरे केे डायवर्ट करने की याद प्रशासन को आई तो सिंचाई विभाग हरकत में आया नजर आ रहा है। सिंचाई विभाग ने इस बार पूरे पनियाली गदेरे पर अतिक्रमण चिह्नित कर 130 अतिक्रमणकारियों की सूची प्रशासन को सौंप दी है। विभाग पनियाली गदेरे को सुखरो नदी में डायवर्ट करने के लिए योजना बना रहा है।
अतिक्रमण चिह्नित कर रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी गई है। पनियाली गदेरे को सुखरो नदी में डायवर्ट करने के लिए योजना बनाई गई है। योजना की डीपीआर बनाने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया जा रहा है। निविदाएं आमंत्रित की गई हैं।
-सुधीर मोहन डियूंडी, ईई सिंचाई खंड दुगड्डा।
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