कोटद्वार। आजादी के 70 साल बाद भी सड़क सुविधा न मिलने से विकासखंड दुगड्डा के तीन ग्राम पंचायतों के करीब 15 गांवों के लोग आज भी सात से दस किमी पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंच रहे हैं। अविभाजित उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड राज्य के गठन हुए भी 18 साल होने को हैं, लेकिन उनके गांवों तक यातायात सुविधा प्रदान करने के लिए प्रस्तावित नाथूखाल-चूना महेड़ा मार्ग सरकारी फाइलों में दबकर रह गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में सड़क निर्माण को मंजूरी तो मिल गई, लेकिन अब भी ग्रामीण पथराई आंखों से सड़क निर्माण की राह देख रहे हैं।
क्षेत्र में तीन ग्राम पंचायतें धूरा धनाई, धूरा भरपूर और चूना महेड़ा पड़ती हैं। इक्कीसवीं सदी में भी इन ग्राम पंचायतों के राजस्व ग्राम और उपग्राम नाथूखाल, मवासा, सिलेड़ी तल्ला, मल्ला, बोरगांव प्रथम, द्वितीय, श्यालगढ़, कंडियाल गांव, बोर गांव, जामुनखेत, ककड़ाढांग, अमल्डू तोक के ग्रामीण सात से दस किमी पैदल दूरी तय कर वाहन पकड़ने के लिए नाथूखाल पहुंचते हैं। महाबगढ़ मंदिर समिति के सचिव अनिल भंडारी, ग्रामीण हरि सिंह, चूना महेड़ा के प्रधान संदीप कुमार बताते हैं कि बीमार और गर्भवती महिलाओं को सड़क तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। रात को यदि कोई बीमार पड़ जाए तो मुश्किल और बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 से क्षेत्रवासी नाथूखाल से चूना महेड़ा तक मोटर मार्ग निर्माण की मांग कर रहे हैं। सड़क निर्माण के लिए पांच बार सर्वे हो गया, लेकिन उनकी सड़क राजनीति की शिकार हो गई है।
नाथूखाल से चूना महेड़ा तक साढ़े दस किमी मोटर मार्ग पीएमजीएसवाई फेज-15 में स्वीकृत है। सड़क निर्माण की सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। सड़क निर्माण के लिए बजट भी स्वीकृत हो गया है। अगले माह तक इसके टेंडर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
-सत्यवीर सिंह त्यागी, एई पीएमजीएसवाई सिंचाई खंड कोटद्वार।