बैजरो/बीरोंखाल। तीन साल बाद गढ़-कुमाऊं की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ कालिंका के दरबार में आयोजित जतोड़ा मेले में शनिवार को गढ़वाल और कुमाऊं के श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में उमड़े भक्तों ने मां कालिंका के दर्शनकर पुण्य अर्जित किया। इस मौके पर पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा की जिला पुलिस प्रशासन को व्यवस्थाएं बनाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दोनों मंडलों में बडियारी रावतों के 11 गांवों और प्रवासी बंधुओं, ध्याणिओं ने मां कालिंका की पूजा-अर्चना की।
गढ़-कुमाऊं की सीमा पर करीब 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कालिंका मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। मंदिर में दर्शनों के लिए लंबी कतार लगी हुई थी। बीरोंखाल, मटगानी, सराईखेत, कोठा, जोगीमढ़ी से लोग मंदिर की चढ़ाई चढ़ने लगे। भक्तों में मां कालिका तक जल्दी पहुंचने की होड़ लगी थी। पुलिस प्रशासन को मंदिर में पशुबलि होने की आशंका थी, जिसके चलते पौड़ी और अल्मोड़ा जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। मंदिर समिति की ओर से पूजा के लिए बागी (भैंसे) के स्थान पर एक भेड़ बंधी हुई थी, जिस पर श्रद्धालु नारियल और चुनरी चढ़ा रहे थे। मंदिर में दर्शन और भेंट चढ़ाने के लिए तीन से चार घंटे में भक्तों का नंबर आ रहा था। लंबी लाइन के कारण ज्यादातर श्रद्धालु लाइन में लगने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
कालिंका मंदिर में होने वाले इस जतोड़ा मेले में शामिल होने के लिए गढ़वाल और कुमाऊं के साथ ही बड़ी संख्या में प्रवासी लोग पहुंचे थे। रामनगर से श्रद्धालुओं केे लाने और ले जाने के लिए परिवहन कंपनियों की ओर से सैकड़ों वाहन लगाए गए थे। मंदिर के मुख्य पुजारी ज्ञान सिंह रावत का कहना था कि इस बार के जतोड़ा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 35 से 40 हजार के बीच रही।