कोटद्वार। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) भवदीप रावते की अदालत ने फर्जी दस्तावेज के जरिए बैंक से दस लाख रुपये का हाउस लोन लेने के आरोपी दो सगे भाइयों को दोषसिद्ध करार देते हुए एक को छह साल और दूसरे को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्तों को दो लाख रुपये का जुर्माना भी ठोका गया है। जुर्माना अदा न करने पर उन्हें हर मामले में अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने यह सजा पंजाब नेशनल बैंक किशनपुर भाबर के प्रबंधक की ओर से गत वर्ष दायर धोखाधड़ी के मुकदमे में सुनाई है।
सहायक अभियोजन अधिकारी अजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि मामला वर्ष 2015 का है। पंजाब नेशनल बैंक किशनपुर भाबर के प्रबंधक ने कोटद्वार थाें में महाराज सिंह बिष्ट पुत्र बीरेंद्र सिंह, उसके छोटे भाई रवींद्र बिष्ट निवासी अगरोडा पट्टी कपोलस्यू पौड़ी गढ़वाल और मेहरबान सिंह पुत्र शेखर सिंह निवासी पदमपुर मोटाढांक तहसील कोटद्वार के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 10 लाख रुपये का हाउसिंग लोन लेने का आरोप लगाया। बैंक की तहरीर के आधार पर इस मामले की पुलिस ने जांच की और गत वर्ष 25 मार्च, 2017 को कोतवाली में उक्त तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120-बी, 467, 468 और 471 में मुकदमा पंजीकृत कर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
एसीजेएम भवदीप रावते की अदालत ने अभियुक्त महाराज सिंह को धोखाधड़ी (आईपीसी की धारा 420) में पांच साल का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, धन प्राप्त करने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के मामले में (धारा 467/120-बी) छह साल की सश्रम कैद और एक लाख रुपये जुर्माना, छल के प्रयोजन से कूटरचना (धारा 468/120-बी) के आरोप में पांच साल के सश्रम कारावास और फर्जी दस्तावेज को असली दस्तावेज के रूप में पेश करने के आरोप में (धारा 471/120-बी) दो साल के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया है। अभियुक्त महाराज सिंह की सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि भी इसमें समायोजित समझी जाएगी।
इसी मामले में कोर्ट ने महाराज के छोटे भाई रवींद्र सिंह को जहां धारा 467/120-बी में दोषमुक्त कर दिया, वहीं उसे धोखाधड़ी का दोषी पाते हुए पांच साल की सश्रम कैद और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस मामले में गारंटर बने मेहरबान सिंह को उस पर लगे सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है।
एपीओ अजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि एसीजेएम कोर्ट ने पदमपुर मोटाढांक में उषा देवी रावत के साथ धोखाधड़ी के दूसरे मामले में भी अभियुक्त महाराज सिंह को दोषसिद्ध करार देते हुए पांच साल का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है।