कोटद्वार। शहर से सटे काशीरामपुर तल्ला गांव में केंद्रीय विद्यालय और आयुर्वेदिक महाविद्यालय के लिए चयनित सरकारी भूमि पर कब्जे के प्रयास के विरोध में क्षेत्रवासियों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने मंगलवार को तहसील में प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ भूमाफिया सत्ता की आड़ में सरकारी जमीन कब्जाने की फिराक में हैं, उनके मंसूबे कामयाब नहीं होने दिए जाएंगे। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने वालों को शह दी गई तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
मंगलवार को पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सूरज प्रसाद कांती की अगुवाई में काशीरामपुर तल्ला के ग्रामीणों के साथ ही शहर के कई संगठनों से जुड़े लोगों ने तहसील में धरना-प्रदर्शन कर भूमाफिया के खिलाफ हुंकार भरी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की मिलीभगत और सत्तारुढ़ दल की शह पर भूमाफिया काशीरामपुर तल्ला में बंजर पड़ी सरकारी जमीन पर कब्जे का प्रयास कर रहे हैं। कहा कि कई बीघा जमीन अभी तक बंजर पड़ी है, जहां पर राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय और केंद्रीय विद्यालय के लिए भूमि चयनित की गई है। यदि इस जमीन पर भी अतिक्रमण हो गया तो प्रशासन को सरकारी प्रतिष्ठानों के लिए कहीं जगह नहीं मिलेगी। कहा कि सरकारी जमीन को किसी भी कीमत पर कब्जाने नहीं दिया जाएगा।
काशीरामपुर के ग्रामीणों के आंदोलन को पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने समर्थन दिया। परिषद ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय और आयुर्वेदिक महाविद्यालय के लिए प्रशासन की ओर से उक्त सरकारी जमीन का चयन किया गया है। ऐसे में उस पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार सीएस रावत को ज्ञापन भी सौंपा। पूर्व सैनिक सेवा परिषद के अध्यक्ष गोपालकृष्ण बड़थ्वाल, सचिव महानंद ध्यानी, कोषाध्यक्ष बलवान सिंह रावत सहित कई पदाधिकारियों ने आंदोलन को समर्थन देते हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया। धरना-प्रदर्शन में जगमोहन सिंह नेगी, मदन सिंह बिष्ट, बलवीर सिंह, परमानंद, किशन सिंह बिष्ट, राजेंद्र सिंह रावत, भारत सिंह रावत, वीर सिंह रावत, कमल सिंह असवाल, कुंवर सिंह रावत, सुरेंद्र सिंह, मनोज भट्ट, शिवचरण सिंह भंडारी, राम सिंह, रुकमा देवी, गौरा देवी, शांति देवी, अनीता देवी, मालती देवी, रीना देवी, अंजू देवी, ममता देवी आदि शामिल रहे।