कोटद्वार। कोटद्वार भाबर की 35 ग्राम पंचायतों के 73 गांवों को नगर निगम में शामिल करने के विरोध में नगर निगम विरोध संघर्ष समिति के बैनर तले जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शहर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। मंगलवार से समिति ने तहसील मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन शुरू करने का एलान किया। प्रदर्शन में शामिल विभिन्न सामाजिक संगठनों, ग्राम पंचायतों, राजनीतिक और सांस्कृतिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने नगर निगम और सरकार के विरोध में नारेबाजी की। तहसील में जाकर महारैली एक जनसभा में तब्दील हो गया।
सोमवार को नगर निगम विरोध संघर्ष समिति से जुड़े सदस्य और ग्रामीण हिंदू पंचायती धर्मशाला झंडाचौक में एकत्र हुए। यहां से ग्रामीण जुलूस रैली की शक्ल में सरकार और नगर निगम के विरोध में नारेबाजी करते हुए तहसील पहुंचे। प्रदर्शनकारी नगर निगम की अधिसूचना को निरस्त करने, ग्राम पंचायतों के अधिकार वापस दिलाने, ग्राम पंचायतों को प्रशासन द्वारा रोका गया बजट अवमुक्त कराने की मांग कर रहे थे। संघर्ष समिति के अध्यक्ष डा. शक्तिशैल कपरवाण ने महारैली को संबोधित करते हुए कहा कि भाबर की जनता द्वारा 5594 आपत्तियां दर्ज कराई गईं। ग्राम पंचायत स्तर पर जनसुनवाई न होने के बावजूद हर ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में हजारों लोगों ने गांवों का वजूद मिटाकर नगर निगम बनाने का विरोध किया, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने जनता द्वारा दाखिल जनता की आपत्तियों का निस्तारण हाईकोर्ट के न्यायाधीश से कराने की मांग की है।
प्रदर्शन में उपाध्यक्ष प्रवेंद्र सिंह रावत, महामंत्री गोविंद डंडरियाल, हरीश घिल्डियाल, आनंदमणि घिल्डियाल, राजाराम अंथवाल, चंद्रमोहन खर्कवाल, विजेश्वरी झिंकवाण, सूरजप्रसाद कांति, बृजपाल सिंह नेगी, गजेंद्र तिवारी, चंद्रमोहन नेगी, गणेश डबराल, प्रदीप नेगी, विजय कंडारी और अंजू पुंडीर आदि मौजूद थे।
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