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इंजीनियरों पर कार्रवाई से भड़का डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ

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कोटद्वार। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ की बैठक में धुमाकोट में हुई बस दुर्घटना में पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। इस मौके पर शासन द्वारा दुर्घटना के तकनीकी पहलुुओं पर गौर करने के बजाय लोनिवि बैजरों में कार्यरत सहायक और कनिष्ठ अभियंता को निलंबित करने को गलत बताया गया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना ओवरलोडिंग के कारण हुई है। छह मीटर चौड़ी सड़क पर मात्र ढाई सेमी गहरे पैच को गड्डा बताया जाना ठीक नहीं। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने शासन पर तकनीकी रिपोर्ट का संज्ञान नहीं लेने का आरोप लगाते हुए एई और जेई का निलंबन वापस लिए जाने की मांग की।
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बृहस्पतिवार को आयोजित बैठक में संगठन के जिला अध्यक्ष जगदीश खाती ने शासन पर बैजरों के अभियंताओं के खिलाफ बेवजह दंडात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होेंने कहा कि दुर्घटना के बाद मुख्य अभियंता गढ़वाल क्षेत्र की अध्यक्षता में गठित टीम में शामिल उपजिलाधिकारी लैंसडौन, अधिशासी अभियंता बैजरों, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता की संयुक्त टीम ने दुर्घटनास्थल का निरीक्षण किया था। इसमें उक्त स्थान पर मार्ग की चौड़ाई छह मीटर, मार्ग पर पड़े पैच की लंबाई पांच मीटर, 0.75 मीटर चौड़ाई और 2.50 सेमी गहराई बताया। इंजीनियरों ने उक्त पैच को बस दुर्घटना का कारण नहीं मानते हुए 28 सीटर बस में 61 पैसेंजर बिठाने के ओवर लोडिंग को प्रमुख वजह माना है। इस तकनीकी समीक्षा रिपोर्ट को आयुक्त गढ़वाल और मुख्य अभियंता गढ़वाल क्षेत्र को प्रेषित किया गया हैै, लेकिन शासन ने तकनीकी समीक्षा रिपोर्ट का बिना संज्ञान लिए ही अभियंताओं को जिम्मेदार मान लिया और लोनिवि बैजरों के सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर दी।
बैठक में संघ के जिलाध्यक्ष इंजीनियर जगदीश खाती, सचिव आलोक जैन, यू खान, विवेका प्रसाद सेमवाल, वाईएस यादव, प्रदीप खंसीली, बीपी उनियाल, हरीश गैरोला, विपिन डोभाल व आलोक कुमार आदि मौजूद थे।
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