कोटद्वार। कण्वाश्रम विकास समिति की बैठक में सदस्यों ने महर्षि कण्व ऋषि की तपस्थली और चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम का विकास राष्ट्रीय गौरव और ऐतिहासिकता के मद्देनजर करने की मांग उठाई गई। तय किया गया कि वसंत पंचमी के मेले के दौरान समिति का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर कण्वाश्रम को पुरातत्व विभाग की सूची में शामिल करने और इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की बात रखेगा।
पदमपुर सुखरौ पंचायतघर में आयोजित समिति की बैठक में वर्ष 2012 में कण्वाश्रम में निकली पुरातात्विक महत्व की करीब दर्जनभर मूर्तियों को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार से वापस कण्वाश्रम लाने की मांग की गई। समिति के अध्यक्ष कमांडर बीएस रावत ने कहा कि लैंसडौन वन प्रभाग ने डेढ़ साल पहले ये मूर्तियां स्थानीय प्रशासन और समिति के सदस्यों को विश्वास में लिए बगैर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के सुपुर्द कर दी थी। बसंत पंचमी के मेले में देश-विदेश से लोग कण्वाश्रम को देखने के लिए आते हैं, ऐसे में इन मूर्तियों का कण्वाश्रम में होना जरूरी है। कहा कि पांच साल पहले इन मूर्तियों को वन विभाग के संरक्षण में मालिनी वन्यजीव विहार कण्वाश्रम में रखवाया गया था। ये मूर्तियां भारतीय पुरातत्व विभाग की संपत्ति और राष्ट्रीय धरोहर हैं।
समिति की महासचिव आभा डबराल, सचिव चंद्रप्रकाश नैथानी, चक्रधर शर्मा कमलेश, मोहन सिंह रावत, डा. पदमेश बुड़ाकोटी, डा. जीतेंद्र नेगी, डा. जय सिंह और जानकीप्रसाद धस्माना ने बताया कि मुख्यमंत्री से मिलकर कण्वाश्रम को पुरातत्व विभाग की सूूची में शामिल कराने के लिए कहा जाएगा। सदस्यों ने कहा कि कण्वाश्रम देश की धरोहर है, जिसका विकास राष्ट्रीय गौरव के हिसाब से होना चाहिए।