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Haridwar News: अमर उजाला ने दिया मंच तो अफसरों ने मुखरता से गुरु बनकर पढ़ाये बच्चे

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अमर उजाला की ओर से मंच दिया गया तो अफसरों ने भी गुरु बनकर बच्चों को पढ़ाया। उनकी ओर से अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा किए गए। बच्चों अपने छात्र जीवन और वर्तमान छात्र जीवन में आए बदलाव को बताने के साथ ही समझाया भी। डिजिटल के युग में सतर्क रहने के लिए आगाह किया तो बढ़ते प्रतिस्पर्धा के दौर में हर चुनौतियों के लिए तैयार रहने के लिए आगाह भी किया। पढ़-लिखकर अपना कॅरियर बनाने के साथ ही राष्ट्र और समाज के हित में कार्य करने का भी आह्वान किया।
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स्कूलों से ही जलेगी भविष्य की जोत: अजय
कार्यक्रम में पहुंचे एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि बच्चों के जीवन के भविष्य की जो जोत जलेगी वह शिक्षकों और स्कूलों से ही लेगी। उसी जोत को जलाकर हमेशा रखना होगा। क्योंकि इससे ही भविष्य अपने आप संवर जाएगा। एसएसपी ने कहा कि शिक्षकों और बड़ों का हमेशा सम्मान करना चाहिए। उनका सम्मान करने से वह स्वयं ही निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे। कहा कि आज के समय अनेक चुनौतियां हैं, लेकिन इन चुनौतियों को पार शिक्षक से ही करा सकते हैं। कहा कि आने वाला समय विश्व में भारत का है। इसलिए आने वाले सुनहरे पल में अपनी आहुति डालने के लिए वह कड़ी मेहनत के साथ आगे बढ़ें।




डिजिटल युग में नियंत्रण करना भी सीखें बच्चे: प्रतीक
मुख्य विकास अधिकारी प्रतीक जैन ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनको मोबाइल तब मिला था, जब उन्होंने इंटर की पढ़ाई पूरी कर ली थी। वह भी आगे की पढ़ाई के लिए इसलिए दिया गया तो था कि वह घर से बाहर जा रहे थे, लेकिन आज अधिकांश बच्चों के हाथों में दसवीं और 12 वीं में ही मोबाइल आ जाता है, लेकिन मोबाइल पर वह नियंत्रण करना भी सीखें, जो नहीं है। अच्छी संगत में रहें। बड़ों से बात करें और सोच-समझकर निर्णय लें।
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प्रतिस्पर्धा के दौर में चुनौतियों से लड़ने को रहें तैयार: राणा
एसडीएम हरिद्वार सदर पूरण सिंह राणा ने अपने छात्र जीवन की यादों को ताजा किया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चला कि सिविल सर्विस सेवा की तैयारी के लिए युवा लखनऊ और इलाहाबाद जाते हैं। उनके गुरुजी के बच्चे भी तैयारी के लिए गए। वह भी सिविल सर्विस की तैयारी के लिए गए। परीक्षा पास की। आज भी प्रतिस्पर्धा का दौर है। इसलिए हर चुनौतियों के लिए तैयार रहें। जब वह गांव जाते हैं तो उनकी मां को लोग कहते हैं कि इनका बेटा एसडीएम है। इसी तरह वह भी निरंतर संघर्ष करते हुए अपनी मंजिल पाएं। जिससे आपके अभिभावकों को भी उनकी मां की तरह एक दिन गर्व होगा।
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