नौ दिसंबर तक 27 हजार क्विंटल डीएपी की रैक जिले में पहुच जाएगी। मुख्य कृषि अधिकारी की केंद्रीय उवर्रक मंत्रालय में हुई वार्ता में यह आश्वासन मिला है। इससे किसानों का गेहूं की बुआई के लिए डीएपी का इंतजार दूर हो जाएगा।
क्षेत्र में किसानों की ओर से गन्ने की कटाई कर गेहूं की बुआई के लिए खेतों को तैयार तो कर दिया जा रहा है, लेकिन डीएपी नहीं होने से बुआई नहीं कर पा रहे हैं। किसान सहकारी गोदाम से बिना डीएपी लौट रहे थे। अधिकारियों की ओर से भी डीएपी कब आएगी, इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी जा रही थी। इससे किसान चिंतित हैं। इम मामले को अमर उजाला की ओर से बुधवार के अंक में ‘50 हजार क्विंटल डीएपी की मांग, आधी भी नहीं आई, कैसे हो बुआई’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।
इसका संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी को निर्देश दिए। इस पर उन्होंने भारत सरकार के उर्वरक मंत्रालय में वार्ता की। इस पर भारत सरकार के प्रतिनिधि ने उन्हें अवगत कराया कि फास्फेटिक उर्वरक आयातित होने के कारण पूरे देश में डीएपी की कमी है।
बताया गया है कि जनपद हरिद्वार के लिए इफको डीएपी उर्वरक की 27 हजार क्विंटल डीएपी की एक रैक बुधवार को कांडला पोर्ट गुजरात में लोड करवाई जा रही है। इसके हरिद्वार में नौ दिसंबर तक पहुंचने की संभावना है। डीएपी उर्वरक को सहकारी समितियों के माध्यम से जल्द ही किसानों को देना शुरू कर दिया जाएगा।