भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री सुमित सिंघल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड के परामर्श पर शासन ने 25 की वृद्धि करने का ऐलान किया है। जिसमें अकुशल, अर्ध कुशल एवं कुशल श्रमिकों को श्रेणी के अनुसार वेतन तय किया गया है। एक्ट में भी यह प्रावधान है कि हर पांच वर्षों में न्यूनतम वेतन की बढ़ोतरी सरकार करती है। उन्हाेंने न्यूनतम वेतन न देने वाले उद्योगों के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया।
प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में सिंघल ने कहा कि सरकार की ओर से न्यूनतम वेतन में वृद्धि करने के दो महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक कई उद्योगों की ओर से न्यूनतम वेतन मजदूरों को नहीं दिया जा रहा है, जबकि ऐसे उद्योग तमाम तरह की सुविधाए, सब्सिडी सरकार से ले रहे हैं।
उसके बावजूद भी आज ऐसे उद्योग प्रबंधन ने श्रमिकों को बंधुआ मजदूर बनाकर रख दिया है। जिससे आज इतनी महंगाई और कठिन परिस्थितियों में श्रमिकों की ओर से अपने परिवार का पालन पोषण करना बहुत मुश्किल हो रहा है। आज श्रमिकों से 12 से 15 घंटे से भी अधिक कार्य लिया जा रहा है। इस मौके पर संघ के जिला मंत्री ललित पुरोहित, पवन शर्मा, नरेश रावत, राजवीर सिंह आदि मौजूद रहे।