हरिद्वार। पारिजात साहित्यिक व सांस्कृतिक मंच की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवि साधुराम पल्ल्व ने ये खुशियों की घड़ियां मुबारक तुम्हें, ये फूलों की लड़ियां मुबारक तुम्हें रचना सुनाकर संस्था के अध्यक्ष को शुभाकामनाएं दीं। अरुण कुमार पाठक ने कैसे कह दूं कि मुलाकात नहीं होती, रोज मिलते हैं, मगर बात नहीं होती, इमरान बदायूंनी ने कौन था तेरे बाद कि जिसने कोशिश की समझने की। कवि बृजेन्द्र हर्ष ने कितने सपने होते अपने कितने प्रहार निसार रहे हैं, नयन वही अर्पण है जो बस अपनी और निहार रहे हैं। सुनाकर वाहवाही लूटी। कवियित्री वृंदा वाणी ने मानव को जो राह दिखाए, गीता वह दिव्य विधान है, डाॅ. सुशील कुमार त्यागी अमित ने मानव जन्म मिला हमको ये ईश्वर का उपकार है, डॉ. अशोक गिरी ने बेवजह किसी को ना सताया जाए, दबे हुए को और ना दबाया जाए। कुंवर पाल सिंह धवल ने है ताक़त आग कि मुझसे मेरे बिन जल नहीं सकती पंक्तियों को सुनाकर तालियों बटोरी। संवाद