अब 20 दिनों के विवाह और शेष रहे गए हैं। विवाहों पर एक बार फिर से विराम लग जाएगा।
ज्योतिष के अनुसार देवोत्थान एकादशी से विवाह प्रारंभ होते हैं। इस बार चार महीनों तक विवाहों पर विराम लगा था। ऐसा आषाढ़ के महीने में देवशयन हो जाने से होता है। कार्तिक शुक्ल एकादशी आठ नवंबर के दिन विष्णु सहित सभी देवता जग गए, परिणाम स्वरूप विवाहों का सीजन आठ नवंबर से प्रारंभ हो गया। यह सीजन 12 दिसंबर यथावत चलता रहेगा। इन 20 दिनों में विवाह के 12 शुद्ध पड़ रहे हैं। ज्योतिष के विद्वान पंडित हरिओम शास्त्री के अनुसार पौष के मास को खर मास कहा गया है। इस महीने में एक बार फिर से विवाह रुक जाते हैं। 13 दिसंबर से 10 जनवरी तक अब विवाह नहीं होंगे। देवशयन की भांति पौष मास को भी विवाह आदि मांगलिक कार्यों के लिए निषिद्ध किया गया है। इन दिनों दक्षिणायन चल रहा है। मंगलमय विवाहों का सीजन एक बार फिर सूर्य के उत्तरायण होते ही मकर संक्रांति 14 जनवरी से परवान चढ़ जाएगा। धूमधाम से बैंड बाजे बजते रहेंगे। विवाह होते रहेंगे। 14 जनवरी से शुुरू होने वालेे विवाह एक मार्च तक लगातार चलेंगे। दो मार्च को होलाष्टक प्रारंभ हो जाएंगे। उसी दिन से इस संवत के विवाह समाप्त हो जाएंगे। चैत्र शुक्ल पक्ष में एक बार फिर से मंगल मुहूर्त प्रारंभ होंगे।