सरबती धान की खुशबू के साथ रसगुल्ला नाम से प्रचलित गन्ने की प्रजाति की मिठास ही उसकी दुश्मन बन गई है। हाथियों के झुंड को सरबती की खुशबू और गन्ने की मिठास जंगलों से खेतों की तरफ खींचकर ला रही है। हाथियों की झुंड रात के समय खेतोें में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों की तमाम कोशिशों के बाद भी हाथियों के उत्पात पर रोक नहीं लग पा रही। परेशान किसानों ने वन विभाग से गश्त बढ़ाकर हाथियों को खेतों की तरफ आने से रोकने की मांग की है।
जनपद के पथरी क्षेत्र के किसान कई हेक्टेयर में सरबती धान की की खेती करते हैं। इन दिनों खेतों में सरबती और बासमती की फसल लहलहा रही है। फसल जब पकने को तैयार होती है तो उसकी खुशबू दूर तक फैलती है। सरबती और बासमती की फसल पकने लगी है और आसपास के इलाकों में उसकी खुशबू का अहसास किया सकता है। हाथियों को यही खुशबू जंगलों से खींचकर खेतों की तरफ ले आती है।
शुक्रवार की रात को बिशनपुर, पुरानी कुंडी, रानीमाजरा, चांदपुर और कटारपुर गांवों के किसानों की गंगा किनारे के खेतों में हाथियों का झुंड घुस आया। हाथियों ने धान की सफल को खाने के साथ रौंद डाला। शनिवार सुबह जब किसान खेतों की तरफ गए तो तब उनको इसका पता चला। किसान सुशील सैनी, मोहित सैनी, रामशरण, सुखदेव पाल, ब्रजपाल, राजपाल आदि का कहना है कि हाथियों ने कई बीघा धान की फसल को नुकसान पहुंचाया।
क्षेत्र में गन्ने की 038 और 039 प्रजाति की फसल उगाई जाती है। इस प्रजाति के गन्ने के पौधे का छिलका हल्का और ज्यादा मिठास वाला होता है। इसलिए हाथी इसे ज्यादा पसंद करते हैं। इन दिनों गन्ने की फसल भी लगभग तैयार हो चुकी है और हाथी चट कर रहे हैं। गन्ना किसानों का कहना है कि वह पहले से ही बकाया नहीं मिलने और बिजली कटौती से सिंचाई करने के लिए तेल का खर्चा बढ़ने से परेशान हैं। अब रही सही कसर हाथी पूरी कर रहे हैं।
वन क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि इन दिनों हाथी खेतों की ओर आकर नुकसान कर रहे हैं। सूचना मिलने पर वनकर्मी मौके पर पहुंचकर हाथियों को खेतों से जंगलों की तरफ भगाते हैं। उनका कहना है कि नुकसान का आंकलन करके किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाता है।