- बरसात में बंद रहता है रास्ता, आंदोलन के बावजूद नहीं मिली स्वीकृति
लालढांग। राज्य गठन के 25 वर्ष बीत जाने के बावजूद लालढांग–चिल्लरखाल वन मोटर मार्ग का निर्माण अब तक नहीं हो सका है। मार्ग के अभाव में लालढांग क्षेत्र की करीब 30 हजार आबादी को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यह मार्ग राजधानी देहरादून को कोटद्वार और रामनगर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। लालढांग से चिल्लरखाल तक लगभग 11 किलोमीटर का हिस्सा क्षतिग्रस्त है। मार्ग में पड़ने वाली नदियों के कारण बरसात में जलस्तर बढ़ने पर यह सड़क तीन से चार महीने तक बंद रहती इस मार्ग पर लालढांग क्षेत्र के नयागांव, रसूलपुर मीठीबेरी, मंगोलपुरा, कटेबढ़, चमरिया, रसूलपुर गौट सहित कोटद्वार भाबर क्षेत्र के किशनपुरी, हल्दुखाता, चौड़खाता, सिगड़ी, मोटाढाक और कोटद्वार के लोगों का नियमित आवागमन निर्भर है। बरसात के दिनों में लालढांग से कोटद्वार की 25 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए लोगों को नजीबाबाद होकर करीब 60 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। मार्ग निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन वन कानूनों के चलते मामला न्यायालय में विचाराधीन है। निर्माण की मांग को लेकर लालढांग–चिल्लरखाल वन मोटर निर्माण समिति की ओर से चिल्लरखाल में आंदोलन जारी है। लालढांग कंडी रोड संघर्ष समिति के अध्यक्ष आर.एस. मनराल ने बताया कि समिति द्वारा पूर्व में मार्ग निर्माण की मांग को लेकर 287 दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल प्रमुख वन संरक्षक आर.के. मिश्रा से भी मुलाकात कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक मार्ग निर्माण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।