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महात्मा गांधी पर अभद्र टिप्पणी अशोभनीय: संतोषानंद

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महामंडलेश्वर राजगुरु स्वामी संतोषानंद ने कहा कि धर्म संसद ऐसी व्यवस्था है जो सनातन धर्म पर किसी भी प्रकार के आक्रमण पर आयोजित की जाती है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोई भी धर्म संसद का चयन कर लेता है। समाज को गुमराह भी करता है। धर्म संसद का आयोजन सुनिश्चितता के साथ होना चाहिए। धर्म विशेष या व्यक्ति विशेष से इसका कोई लेना देना नहीं होता है। यदि सनातन धर्म की रक्षा के लिए कार्य किया जाता है तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इससे कोई विवाद उत्पन्न न हो। धर्म संसद में महात्मा गांधी पर की गई टिप्पणी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसा किया जाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। देश विभाजन के समय विपत्ति काल में महात्मा गांधी ने किस काल और परिस्थितियों में निर्णय लिया यह उस समय की बात है। वर्तमान समय में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन चलाया, दांडी यात्रा की, विदेशी वस्त्रों की होली जलाई और समाज को अहिंसा का संदेश दिया। राष्ट्र निर्माण में उनका अतुल्य योगदान आज भी प्रासंगिक है।
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