फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haridwar News: सब्र और जज्बा... नन्हें रोजेदार भी दे रहे इम्तिहान, रोजा रख कर इबादत में हैं मशगूल

Thu, 28 Mar 2024 10:58 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार

सार

माह-ए-रमजान में छोटे बच्चे भी रोजा रख इबादत कर रहे हैं। रब को राजी करने में बच्चे भी पीछे नहीं है।
विज्ञापन
रमजान (प्रतीकात्मक फोटो)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पाक मुकद्दस माह-ए-रमजान में बड़े ही नहीं बल्कि छोटे बच्चे भी रोजा रखकर इबादत में मशगूल हैं। कई बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने इस साल पहला रोजा रखा तो कई पिछले दो साल से रोजा रख रहे हैं। करीब साढ़े 13 घंटे से अधिक रोजे से भूखे-प्यासे रहकर पांचों वक्त रब की बारगाह में सजदा कर दुआ मांग रहे हैं।

विज्ञापन


बच्चों का जज्बा और सब्र देखकर बड़े भी उनके कायल हो रहे हैं। माह-ए-रमजान इस्लाम में 12 महीनों में सबसे खास माना जाता है। इसमें हर बालिग के ऊपर रोजा रखना फर्ज है, लेकिन छोटे बच्चे भी रब को राजी करने के लिए पीछे नहीं हैं। वह भी पूरी कसरत के साथ इबादत में जुटे हैं और रोजे रख रहे हैं।

ज्वालापुर मैदानियान निवासी प्रवेज खान के 10 वर्षीय बेटे हसनैन खान दो साल से रोजा रख रहे हैं। आरिफ खान की 10 वर्षीय बेटी हिबा खान ने इस बार पहला रोजा रखा। कैथवाड़ा निवासी मेहताब आलम के नौ वर्षीय बेटे फैज आलम भी दो साल से तो रिहान के नौ वर्षीय बेटे फजल भी रोजा रखकर अल्लाह की इबादत में मशगूल हैं। नन्हें रोजेदारों का कहना है कि अपने रब को राजी करने के लिए वह रोजा रख रहे हैं।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें...Lok Sabha Election: 44 हजार से अधिक छात्रों ने अपने माता-पिता को लिखी चिट्ठी, बोले- मम्मी-पापा कर लो ये नोट
विज्ञापन


रब उन्हें हिम्मत और सब्र दे रहा है। भूख-प्यास बिल्कुल नहीं सता रही है। वहीं, ज्वालापुर के कोटरवान निवासी इनाम खान की बेटी शिदरा खान ने छह साल की उम्र में पहला रोजा रखा है। बेटी के हौंसला अफजाई के लिए मां फरहा खान घर में पकवान तैयार कर रही हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें