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I- बड़े-बड़े शोरूम और व्यावसायिक भवनों में बगैर पार्किंग नक्शा पास करा लिए
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I-वर्तमान में एचआरडीए की सख्ती के चलते नए व्यावसायिक भवनों पर है अंकुश
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Iशहर के बड़े हिस्से में व्यावसायिक भवनों की भरमार है। यही नहीं आश्रम और अखाड़े भी कई जगह बिना पार्किंग चल रहे हैं। इस वहज से शहरवासियों को जाम की समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है। सवाल यह है कि यदि इन व्यावसायिक भवनों के निर्माण के समय ही सख्ती होती तो आज हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को कार्रवाई नहीं करनी पड़ती।
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Iशहर में वर्तमान में संचालित बड़े शोरूम और अन्य व्यावसायिक भवनों के पास अपनी पार्किंग नहीं है। इसका खामियाजा राहगीरों को उठानी पड़ती है। मुख्य मार्ग से लेकर गली कूचे तक वाहनों की भरमार रहती है। कई जगह तो कोचिंग संस्थान किए जा रहे हैं, जहां पर एक शिफ्ट में दो से ढाई सौ बच्चे पढ़ने आते हैं, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। अकेले रानीपुर मोड़ से दो कोचिंग क्लास संचालित हो रहे हैं। इन भवनों के पास भी अपनी पार्किंग नहीं है।
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Iइसी तरह प्रेमनगर चौक के पास एक बड़े कांप्लेक्स का निर्माण किया गया। यहां पर पार्किंग की सुविधा नहीं होने से ग्राहकों के वाहन रोड पर खड़े किए जा रहे हैं। बड़े होटलों में फिलहाल अपनी पार्किंग की व्यवस्था है, जिसके चलते चंद्राचार्य चौक क्षेत्र में थोड़ी राहत है।
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Iनए नियम के तहत बिना पार्किंग नहीं होगा भवन का नक्शा पास : अंशुल सिंह
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Iहरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्व में हुई अनदेखी को बाजार व व्यावसायिक भवनों के सामने पार्किंग की असुविधा को गंभीरता से ले रहे हैं। उनका कहना है वर्तमान में नए नियम के तहत जिन व्यावसायिक भवनों में पार्किंग की सुविधा नहीं दी जा रही है, उनका नक्शा किसी भी दशा में पास नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एचआरडीए नए भवन निर्माण को लेकर निगरानी कर रहा है। उन्हाेंने कहा कि मानकों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध भवन सील करने से लेकर जुर्माना तक की कार्रवाई की जा रही है। अवैध प्लाटिंग और मानक के विपरीत बन ने भवन पर पिछले एक साल में जितनी कार्रवाई की गई उसका परिणाम यह रहा कि वर्तमान में नक्शा पास कराने के बाद भी भवन बनाए जा रहे हैं।
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Iजिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट पर भी नहीं हुई पहल
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Iशहर में जाम को लेकर पूर्व में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया। कमेटी ने शहर से लेकर धार्मिक स्थल क्षेत्र में जाम के मुख्य कारक में ई-रिक्शा और ऑटो की बढ़ती संख्या को आधार माना था। वहीं, व्यावसायिक क्षेत्र में पार्किंग की असुविधा पर भी चिंता जताई थी। इसको लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी ने शासन स्तर पर 11 बिंदुओं के सुझाव भी दिए थे। इस पर कोई पहल नहीं हो सकी।I