फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘होली ठेठर’ ने की सामाजिक कुरीतियों पर चोट

Sat, 02 Apr 2016 12:00 AM IST
hridwar uttrakhanda india
विज्ञापन
कुरीतियों पर किया कटाक्ष - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
हरिद्वार। अर्द्ध कुंभ मेले के सांस्कृतिक पंडाल में नैनीताल की सांस्कृतिक संध्या ‘युगमंच’ द्वारा प्रस्तुत लोक नाटक ‘होली ठेठर’ के नाम रही। भारतेंदु हरिश्चंद्र लिखित भारत दुर्दशा, वैदिकी हिंसा हिंसान भवति और अंधेर को मिलाकर रचित नाट्य लेखक राजीव कुमार (बाबा) डायरेक्टर फिल्म डिवीजन और निर्देशक जहूर आलम ने कलाकारों के साथ इसे प्रस्तुत किया। इसके जरिये सामाजिक कुरीतियों पर चोट की गई। ‘होली ठेठर’ कुमाऊं के पहाड़ों में होली का त्यौहार पर किया जाने वाला एक प्रकार का स्वांग है। इसका विषय समाज और देश में पनपती भयंकर विकृतियां और स्वार्थी सत्ता है। न्याय का स्वांग इसका स्थायी भाव वैदिकी हिंसा भारत दुदैव का दीवान-ए-खास है और अंधेर नगरी दीवान-ए-आया। ‘होली ठेठर’ में भारतेंदु का शाश्वत दर्शन है। प्रस्तुत नाटक को आधा पात्रों द्वारा और आधा कोरस द्वारा प्रस्तुत किया गया। लेखक द्वारा स्क्रिप्ट को कुमाऊं में प्रचलित होली स्वांग में बाधकर खड़ी होली, झोडा, चॉचरी नृत्य, न्योली व जागर की लोक धुनों में पिरोकर प्रचलित लोक विधाओं के प्रयोग से सुसज्जित कर प्रस्तुत किया गया। निर्देशक ने नाटक में पहाड़ की ऊंचाइयों, गहराइयों और घाटियों को अपने विकल सौंदर्य और रंगों के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। पिछले 40 वर्षों से नैनीताल में रहते हुए संस्कृति और नाट्य कर्म से जुडे़ निर्देशक जहूर आलम को उत्तराखंड सरकार द्वारा उत्तराखंड साहित्य संस्कृति एवं कला परिषद के उपाध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया है। उदय शंकर तथा पर्वतीय बिगुल और नागरिक सम्मान पा चुके जहूर आलम अनुपम खेर, निर्मल पांडेय आदि कई संस्कृति कर्मियों के साथ कार्य कर चुके हैं। प्रस्तुत नाटक में प्रमुख भूमिका में जितेंद्र बिष्ट, ब्रिजेश जोशी, भाष्कर बिष्ट व जहूर आलम सहित 28 से ज्यादा सह कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। इस अवसर पर नोडल अधिकारी प्रह्लाद नेगी व अन्य गण्यमान्य उपस्थित थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें