ऊर्जा निगम की ओर से बिजली बिल जमा नहीं करने पर उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे जा रहे हैं, लेकिन अपने डेढ़ करोड़ रुपये जमा नहीं करा रहा है। 20 सरकारी विभाग भी पांच करोड़ रुपये से अधिक की बिजली फूंककर बिल नहीं भर रहे हैं।
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) का पांच करोड़ 11 लाख 41 हजार रुपये का बिजली बिल हरिद्वार के 20 सरकारी विभाग दबाए बैठे हैं। वहीं, ऊर्जा निगम की टीमें गली-मोहल्लों और गांव-गांव जाकर लोगों से बिजली के बकाया बिल के भुगतान के लिए दबाव बना रही हैं। जबकि, शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर विभाग का 10 हजार रुपये बकाया होने पर भी कनेक्शन काट दिया जा रहे है। जबकि, ऊर्जा निगम के डिवीजन ऑफिस से लेकर सब डिवीजन ऑफिस और बिजली घरों पर डेढ़ करोड़ रुपये का बिल बकाया चल रहा है। इनमें हरिद्वार शहर, ज्वालापुर, लक्सर, सिडकुल डिवीजन शामिल हैं।
बिल जमा नहीं करने पर आम उपभोक्ताओं पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन सरकारी विभागों और ऊर्जा निगम खुद के बिल पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इससे शासन से मिले टारगेट को भी विभाग पूरा नहीं कर पर रहा है। बता दें कि शासन स्तर पर इसी माह हुई बैठक में मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव व सचिवों को 20 मार्च तक बकाया जमा कराने के आदेश दिए थे। मगर, 29 मार्च तक हालात जस के तस बने हुए हैं।
शिक्षा और ऊर्जा निगम सबसे बड़े बकायादार
सरकारी विभागों के 1265 कनेक्शनों में सबसे ज्यादा शिक्षा विभाग के 999 स्कूलों के कनेक्शनों पर तीन करोड़ से ज्यादा बकाया है। दूसरे नंबर पर खुद ऊर्जा निगम के चार डिवीजनों के 39 सब स्टेशनों पर डेढ़ करोड़ रुपये का बिल बकाया है। वहीं, हरिद्वार मेला कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस कार्यालय, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, सेल्स टैक्स, निर्वाचन विभाग, राजस्व प्रशासन, जल निगम, आयुर्वेदिक अस्पताल, खेल विभाग आदि भी बिजली का बिल दबाए बैठे हैं।
हरिद्वार मेलाधिकारी कार्यालय और शिक्षा विभाग समेत बड़े बकायेदारों को नोटिस भेजकर बिल जमा करने को कहा गया है। इसके लिए पत्राचार भी किया गया है। निगम का बिल ऊर्जा भवन से जमा होता है।
- प्रदीप चौधरी, अधीक्षण अभियंता, ऊर्जा निगम, हरिद्वार
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हरिद्वार में सब स्टेशनों पर मीटर नहीं हैं, न ही उन पर कोई बकाया है। अन्य सरकारी विभागों से भी बिल जमा करवाया जा रहा है।
- अनिल यादव, एमडी, ऊर्जा निगम