एक माह हड़ताल के बाद भी राजाजी टाइगर रिजर्व के आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है। डायरेक्टर के मौखिक आश्वासन पर कार्यबहिष्कार को स्थगित कर काम पर लौटना पड़ा है। कर्मियों ने दो माह में सभी मांगें पूरी न होने पर फिर से आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
राजाजी टाइगर रिजर्व की समस्त रेंजों के लगभग दो सौ आउटसोर्स कर्मचारियों ने छह अक्तूबर से आठ माह के वेतन का एकमुश्त भुगतान, पीएफ समेत उपनल में समायोजित करने आदि की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार शुरू कर दिया था। कर्मचारी मांगों के लिए चीला रेंज के गेट से लेकर देहरादून और हरिद्वार वार्डन के कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करते रहे। वार्डन और डायरेक्टर भी मांगों को लेकर उनकी वार्ता हुई, लेकिन वह मांगों के पूरा होने अथवा लिखित में आश्वासन न मिलने तक तक कार्यबहिष्कार करने पर अड़े रहे।
सोमवार को आउटसोर्स कर्मचारी मांगों को लेकर देहरादून में राजाजी टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर साकेत बडोला से मिले। जहां कर्मचारी की शाम को काफी देर बातचीत हुई। जिसमें डायरेक्टर की ओर से कर्मचारियों को मौखिक आश्वासन दिया गया कि उपनल, पीआरडी या कोई नई व्यवस्था में समायोजित करने की व्यवस्था होने पर सबसे पहले उन्हें ही समाहित कर दिया जाएगा। उनके वेतन का भुगतान भी अतिशीघ्र किया जाएगा। पीएफ और ईएसआई का पैसा कर्मचारियों के खातों में ट्रांसफर न करने की जांच की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिससे कर्मचारी डायरेक्टर के आश्वासन पर मान गए।
मंगलवार को सुबह से ही काम पर लौट आए। कर्मचारियों के ड्यूटी पर लौटने से राजाजी प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। वार्ता के दौरान इस्तकार, शमशाद, दीप सिंह, अमर बहादुर, विक्रांत मलिक, कपिल कांबोज, नैन बहादुर थापा आदि मौजूद रहे।