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बस-स्कूटी की भिड़ंत, दो दोस्तों की मौत

Fri, 13 Nov 2015 12:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
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हरिद्वार। हरकी पैड़ी बाईपास पर वीआईपी घाट के पास बृहस्पतिवार देर शाम रुहेलखंड डिपो की बस से हुई भिड़ंत में भेल सेक्टर पांच के स्कूटी सवार दो दोस्तों की मौके पर मौत हो गई जबकि इनके तीसरे साथी की हालत भेल अस्पताल में गंभीर बनी हुई है। शराब के नशे में धुत बस चालक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
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सीओ सिटी चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि दुर्घटना शाम करीब सात बजे हरिद्वार-ऋषिकेश राजमार्ग पर रोड़ीबेलवाला चौकी से कुछ दूरी पर वीआईपी घाट के पुल पर हुई। रुहेलखंड डिपो की बस हरिद्वार से ऋषिकेश की ओर जा रही थी। जबकि स्कूटी सवार तीनों दोस्त विपरीत दिशा से आ रहे थे।

पुल पर पहुंचते ही बस ने सामने से आ रही स्कूटी को टक्कर मार दी। इससे स्कूटी पर सवार मोहित पुत्र मजिस्टर सिंह और सौरभ पुत्र अखिल की मौके पर मौत हो गई। जबकि तीसरे दोस्त राहुल पुत्र सूरजपाल को भेल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सीओ ने बताया कि बस चालक ने शराब पी हुई थी। इसका मेडिकल परीक्षण कराया गया है। सीओ के अनुसार मृतक आईटीआई कर चुके मोहित के पिता भेल में कर्मी हैं और उनका परिवार सेक्टर पांच में रहता है। मूल रूप से गांव माखर, बडौत जिला बागपत का निवासी सौरभ पॉलिटेक्निक कर चुका था। सौरभ के ताऊ अनिल सेक्टर पांच में रहते हैं। वह अपने तहेरे भाई रजत के साथ ताऊ के घर इन दिनों रहने आया हुआ था। तीसरे युवक राहुल ने हाल ही में बीटेक पास की है।
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‘मेरा मोहित, कहां है तू’
हरिद्वार। देर शाम हुए दुर्घटना की सूचना जैसे ही मोहित के भाई को मिली वह तुरंत अपने साले अखिलेश के साथ जिला अस्पताल पहुंचा, लेकिन तब तक परिवार पर टूट चुके पहाड़ सरीखे दर्द से अंजान थे। चंद सेकंडों में जब हकीकत सामने आई तब बड़े भाई रोहित ने सुधबुध खो दी। दहाड़ मार मार कर रो रहे रोहित को साला और अन्य लोग संभालने में लगे रहे लेकिन वह अपने भाई को रहे रहकर पुकारता रहा। चंद मिनट बाद भेलकर्मी अनिल कुमार जब पहुंचे तब उन्हें भी भतीजे के दुनिया में न रहने की बात पर यकीन नहीं हुआ।

पुलिस जब उन्हें मोरचरी ले गई तो उनकी आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड़ आया। तहेरा भाई रजत के चेहरे पर भी लाडले भाई को खो देने का दर्द साफ तौर पर देखने को मिला। देर शाम तक परिजन जिला अस्पताल कैंपस में थे। पुलिसकर्मी उन्हें सांत्वना देने में जुटे थे।

कहां से आ रहे रहे थे तीनों
हरिद्वार। तीनों दोस्त आखिर कहां से आ रहे थे। ये साफ नहीं हो पाया है। स्कूटी मोहित की ही थी और हेलमेट पहना हुआ था। लेकिन यह कोई नहीं जानता था कि वह कहां गए थे ओर क्यों गए थे।

दीपावली पर बुझे चिराग
हरिद्वार। परिवार में छोटे होने के नाते सौरभ और मोहित सबके लाडले थे। हर कोई यह कहता दिखा कि वह बड़े हंसमुख थे। मोहित एवं सौरभ से उसके बड़े भाई के साले अखिलेश की शाम को मुलाकात हुई थी। तब भी मोहित ने उससे काफी हंसी मजाक किया था। यही नहीं दीपावली को लेकर भी बातचीत की थी।
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