शिक्षा नगरी में यातायात नियमों का कितना पालन हो रहा है, इसकी हकीकत बुधवार को स्कूल वैन का एक्सीडेंट होने पर सामने आ गई। चौंकाने वाली बात यह है कि ड्राइवर पर लाइसेंस और गाड़ी के कागजात भी नहीं और 10 सवारी क्षमता वाली वैन में 30 मासूमों को बैठाया गया था।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर पुलिस व एआरटीओ की नजर ऐसे वाहनों पर क्यों नहीं पड़ती। रुड़की में 50 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल ऐसे हैं, जिनमें घर से लाने ले जाने के लिए निजी वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। विडंबना यह है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस विषय पर अधिकतर स्कूल गंभीर नहीं है।
ज्यादातर अभिभावक भी स्कूल वाहनों की क्षमता, फिटनेस से लेकर ड्राइवर की कुशलता की जानना जरूरी नहीं समझते। जबकि हाल यह है खटारा वाहनों में क्षमता से कई गुना ज्यादा बच्चे ढोकर उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। बुधवार को हुई घटना ने पुलिस व एआरटीओ की चेकिंग की पोल भी खोलकर रख दी।
खटारा वाहनों को बना रहे स्कूल वैन
स्कूली बच्चों को घर से लाने ले जाने में खटारा वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पड़ताल में सामने आया है कि दिल्ली, मेरठ जैसे शहरों में कबाड़ी बाजार से 20 से 30 हजार कीमत की खटारा गाड़ियां लाई जाती हैं। ईंधन की बचत के लिए गैस किट लगवाकर हर महीने 20 हजार तक का मुनाफा कमाया जाता है। इस पूरी तिकड़म में बच्चों की जान तक की परवाह नहीं की जाती।
ड्राइवर बोला, बस से बचने पर हुआ हादसा
पुलिस हिरासत में वैन ड्राइवर जहांगीर ने बताया कि हाईवे पर अचानक एक बस गाड़ी के सामने आ गई। उससे बचने के लिए ब्रेक लगाने की कोशिश की तो कोई फायदा नहीं हुआ। किनारे करने पर वैन पोल से टकरा गई।