नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के पॉलीथिन प्रतिबंध के आदेश की हवा निकल गई है। व्यापारियों के विरोध के सामने प्रशासन ने हथियार डाल दिए हैं। रविवार को हरकी पैड़ी क्षेत्र में पॉलीथिन और प्लास्टिक के सामान की दुकानें पूर्व की भांति बेरोकटोक सजीं।
नगर निगम के फूलों के ठेकेदारों प्लास्टिक कैनी और बैग के बंद बोरों का मुुंह फिर खोल दिया है। बरसात में सैकड़ों वेंडरों से पॉलीथिन पन्नी से बने रेन कोट गंगा घाटों पर आवाज लगाकर बेच रहे हैं। पॉलीथिन के 15 रुपये में दो रेन कोर्ट बेचे गए।
एकादशी के स्नान करने आए श्रद्धालुओं को घाटों पर प्लास्टिक की कैनी, बैग और चटाई भी खुलेआम बेची गई। प्रतिबंधित सामान बेचने वालों को न पुलिस ने टोका न नगर निगम कर्मियों ने। हरकी पैड़ी क्षेत्र में फुटकर में पॉलीथिन व प्लास्टिक का सामान बेचने वालों को माल देने वाले थोक विक्रेता भी रिक्शा, रेहड़ा में माल लेकर बेधड़क घूमते रहे।
एनजीटी के 2 जुलाई के आदेश के बाद से आज तक प्रशासन ने प्लास्टिक व पॉलीथिन के एक भी थोक दुकानदार की दुकान व गोदाम पर हाथ नहीं डाला है। केवल कागजी खानापूर्ति दिखाने के लिए वेंडरों का पर जुर्माना भर किया गया है।