हरिद्वार। पिरान कलियर से अपहृत डेढ़ साल के सुदामा को गोद लेने की बात कथित महिला डाक्टर ने पूछताछ में कबूली है। हालांकि पुलिस उसके दावे पर विश्वास नहीं कर रही है। क्योंकि महिला पॉली क्लिनिक का संचालन करती थी। कहीं महिला के तार बच्चा चोर गैंग से तो नहीं जुड़े हैं। इस पहलू पर पुलिस की जांच आकर ठहर गई है।
24 अप्रैल को राजस्थान के बीकानेर के रहने वाले कुलछतर की पत्नी की गोद से उनके डेढ़ साल के बेटे सुदामा को दो मोटर साइकिल सवार उठाकर भाग गए थे। मासूम के अपहरण से हरिद्वार पुलिस में हड़कंप मचा गया था। सोमवार को पुलिस को मुखबिर ने बच्चे को ज्वालापुर के सुभाषनगर में देखे जाने की जानकारी दी। रुड़की और हरिद्वार पुलिस ने सोमवार को सुभाषनगर क्षेत्र का चप्पा-चप्पा खंगाला। देर रात तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद भी पुलिस को सफलता नहीं मिली। मंगलवार की सुबह तपोवन नगर, सुभाषनगर की रहने वाली एक कथित महिला डाक्टर के घर से मासूम सुदामा को बरामद कर लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में महिला ने बताया कि उसकी एक पुत्री है, लेकिन बेटा न होने के कारण वह परेशान थी। इसलिए पांवधोई के रहने वाले एक युवक ने उसे बेटा गोद दिलाने की बात कही थी। जिसके एवज में 50 हजार रुपये देना तय हुए थे। बच्चा मिलने पर उसने 40 हजार रुपये दे दिए थे और दस हजार रुपये की रकम गोदनामे की लिखत पढ़त होने पर देने की बात तय हुई थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक महिला का पति सिडकुल की एक औद्योगिक इकाई में कार्यरत है और उसकी दूसरी शादी है। लेकिन महिला के दावे पर अभी पुलिस को पूरा यकीन नहीं है, इसलिए दिनभर पुलिस इस मामले को लेकर चुप्पी साधी रही और पूरी जांच पड़ताल में जुटी रही। अभी अधिकारिक तौर पर पुलिस अफसर बच्चा बरामद करने की पुष्टि नहीं कर रहे हैं। एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस ने बताया कि पुलिस बच्चे के करीब तक पहुंच गई, जल्द ही खुलासा कर दिया जाएगा।