हरिद्वार। उद्यमी अनिल अरोड़ा अपहरण कांड की साजिश एयरफोर्स में तैनात प्रदीप कुमार ने ही रची थी। कर्ज से उबरने के लिए ही एयरफोर्स के जवान ने अपराध की राह पकड़ी थी। देर शाम हरिद्वार और यूपी पुलिस की संयुक्त पूछताछ में प्रदीप कुमार ने सिलसिलेवार ढंग से पूरे अपहरण कांड की कहानी बताई।
चंडीगढ़ में एयरफोर्स के बेस में जवान के पद पर तैनात प्रदीप कुमार ने जिला अस्पताल में इलाज के दौरान जब जुबां खोली तब हर कोई हक्का बक्का रह गया। चंद मिनट में ही प्रदीप ने अपहरण कांड की कहानी उगल दी। कबूला कि, उसी ने ही इस अपहरण कांड की साजिश रची थी। उसकी पहचान राशिद से करीब ढाई वर्ष पूर्व उसके सैलून पर हुई थी, तब वह मेरठ किसी कार्य से आया था। तब से अब तक राशिद के संपर्क में ही था। कबूला कि उस पर काफी कर्ज हो गया था इसलिए उसने राशिद से मिलकर किसी अपराध को अंजाम देने की योजना बनाई।
बकौल पुलिस राशिद ने अपने परिचित उद्यमी अनिल अरोड़ा को सॉफ्ट टारगेट बताया तब एयरफोर्स का जवान प्रदीप राजी हो गया। फिर आगे की योजना का ब्लूप्रिंट प्रदीप कुमार ने ही खींचा। राशिद ने अपने चचेरे भाई मोहसीन को भी अपने साथ ले लिया, जो पहले पूरी तरह से अनभिज्ञ था। अपहरण के बाद उसका साथ में रहना मजबूरी बन गया। राशिद ने ही असलहे का इंतजाम भी किया था, जो पिस्टल बरामद हुई है वह भी चोरी की है। अभी यह साफ नहीं हुआ कि किसकी चोरी की गई थी। दूसरी बड़ी बात ये भी है कि गैंग ने जिस स्विफ्ट कार का इस्तेमाल किया वह भी करनाल हरियाणा से चोरी की गई थी । उस पर हरियाणा की नंबर प्लेट लगा दी गई थी लेकिन असल में वह कार पंजाब में रजिस्टर्ड है। 20 जनवरी को इन्होंने अपहरण का ताना बाना बुन लिया था और 25 को अपने मकसद में कामयाब भी रहे। उद्यमी की एक विशेष रुचि भी उसका जाल में फंसने का मुख्य कारण बनी थी, अब अंबाला (हरियाणा) में फिरौती की रकम देने की बात पर सहमति बन रही थी।