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टेंडर दिलाने के नाम पर उद्यमी से 12 लाख की रकम हड़पी

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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खेल एवं पर्यटन विभाग में ठेका दिलवाने के नाम पर एक उद्यमी से 12 लाख की रकम ठग लेने का मामला सामने आया है। पीड़ित उद्यमी ने आरोपी दंपति और खुद को सचिवालय में तैनात अफसर बता रहे जालसाज के खिलाफ कोतवाली रानीपुर में मुकदमा दर्ज कराया है।
बहादराबाद औद्योगिक क्षेत्र में संजीव पांधी पुत्र वीके पांधी की प्रणव ऑटो टेक के नाम से कंपनी है। उद्यमी ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि शिवालिक नगर में वह लीलावती अस्पताल में बने प्रकाश मेडिकोज पर दवा लेने जाता था। आरोप है कि उसकी जान पहचान मेडिकल स्टोर स्वामी माणिक टंडन से हो गई। इसी बीच मेडिकल स्टोर स्वामी ने उसे कहा कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण कार्य के दौरान प्लाईवुड की आवश्यकता है। यदि उसका कोई परिचित प्वाईवुड का कार्य करता है तो उसे टेंडर मिल जाएगा। उद्यमी ने अपने रिश्तेदार संजीव अरोड़ा निवासी मुरादाबाद यूपी को यहां बुला लिया। आरोप है कि माणिक टंडन ने अपने मेडिकल स्टोर पर उनकी मुलाकात सौरभ वत्स के नाम से युवक से कराई। युवक ने अपना परिचय चीफ फंगशनरी अधिकारी पर्यटन विभाग के तौर पर देत हुए अपना आईडी कार्ड भी दिखाया। भरोसा होने पर माणिक टंडन, सौरभ वत्स ने उनकी अलग फर्म भी रजिस्टर्ड कराई और रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर भी रकम ली गई।
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आरोप है कि देहरादून के विधायक हॉस्टल के कमरा संख्या 49 में उससे एक फार्म भी भरवाया गया, यह प्रक्रिया दो बार हुई। आरोप है कि इस दौरान समय समय पर उससे कुल 12 लाख की रकम ले ली गई और रकम लेने के दौरान माणिक टंडन की पत्नी रोशनी टंडन भी मेडिकल स्टोर पर मौजूद रही। आरोप है कि वर्ष 2018 के गुजरने के बाद भी जब उसे टेंडर नहीं मिला तब पड़ताल करने पर पता चला कि विभाग ने ऐसा कोई टेंडर निकाला ही नहीं था। कोतवाली प्रभारी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि इस संबंध में प्रभावी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
सौरभ को हाल ही में भेजा जेल
खुद को सचिवालय में तैनात अधिकारी बताने वाले शातिर सौरभ वत्स को कुछ दिन पूर्व ही ज्वालापुर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा है। उसके खिलाफ एक उद्यमी सागर मनचंदा ने इसी तरह की धोखाधड़ी कर 47 लाख की रकम ठग लेने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। उद्यमी को भी टेंडर दिलाने का झांसा दिया गया था। उस मुकदमे में भी पुलिस को मेडिकल स्टोर स्वामी एवं मुख्य आरोपी सौरभ की पत्नी की तलाश है।
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सचिवालय तक जाएंगी जांच
पुलिस की जांच की आंच सचिवालय तक जाना तय है। सूत्रों की मानें तो मुख्य आरोपी सौरभ ने सचिवालय में एक बड़े अधिकारी के ठीक सामने बने उसके अधीनस्थ के कार्यालय में उद्यमियों से मुलाकात कर विभागीय अधिकारी होने का विश्वास दिलाया था। चर्चा है कि सचिवालय के बड़े अफसर के अधीनस्थ से सौरभ के करीबी रिश्ते हैं और उसी के चलते ही वह उसकी कुर्सी पर खुद बैठा था। यह भी कहा जा रहा है कि अधिकारी के अधीनस्थ को भी पूरे मामले की भली भांति जानकारी थी।
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